खैरथल
आठ माह से दर-दर की ठोकरें, फिर भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
खैरथल : जिले में अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता का ताजा उदाहरण उस समय सामने आया जब कोटकासिम पंचायत समिति के करवड़ की ढाणी निवासी सोनू कुमार पुत्र राजेश कुमार अपने दादाजी का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पिछले आठ माह से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल सका।
पीड़ित सोनू ने बताया कि उसके 81 वर्षीय दादाजी श्योनारायण के निधन के बाद ई-मित्र केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया गया था। आवेदन ग्राम पंचायत इकरोटिया के ग्राम विकास अधिकारी रामगोपाल सैनी द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया और प्रमाण पत्र तैयार कर लिया गया। लेकिन जब प्रार्थी ने प्रमाण पत्र की प्रति मांगी तो अधिकारी ने ₹500 की रिश्वत की मांग रख दी।
सोनू के अनुसार, रिश्वत देने से इनकार करने पर उक्त अधिकारी ने ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी कोटकासिम के माध्यम से प्रमाण पत्र कैंसिल करवा दिया। इसके बाद पीड़ित ने न्याय की उम्मीद में जिला कलक्टर को शिकायत दी। कलक्टर ने एसडीएम को जांच कर प्रमाण पत्र जारी करने और दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
लेकिन जांच के नाम पर फिर लीपापोती शुरू हो गई। एसडीएम ने जांच की जिम्मेदारी पटवारी को दी, जिसने आरोपी ग्राम विकास अधिकारी को साथ लेकर विरोधी पक्ष के घर जाकर एकतरफा और झूठी रिपोर्ट तैयार कर दी, जबकि गांव के अन्य लोगों से कोई पूछताछ तक नहीं की गई।
पीड़ित ने हार न मानते हुए उपनिदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को भी शिकायत भेजी, लेकिन वहां भी अधिकारियों ने अपने कर्मचारी का बचाव करते हुए रिपोर्ट में दोषी का उल्लेख तक नहीं किया।
सोनू कुमार का कहना है कि “हम आठ महीनों से विभिन्न दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, पर अधिकारी चुप बैठे हैं। यदि हम गलत हैं तो हमारे खिलाफ कार्रवाई करें, लेकिन एक कर्मचारी को बचाने के लिए पूरा प्रशासन एकजुट नजर आ रहा है।”
मृत्यु प्रमाण पत्र न बनने से परिवार के बैंक खातों, भूमि संबंधी कार्यों और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं पर रोक लगी हुई है। पीड़ित ने अब उच्चाधिकारियों से न्याय और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की हैं एक ओर राजस्थान मे सरकार बड़े शिविर लगा कर लोगों की समस्याओं के समाधान के दावें करती है दूसरी ओर धरातल पर मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी आठ महीने से लोग ठोकरें खा रहे है


