पाकुड़ से बड़ी ख़बर: आज़ादी के 75 साल बाद भी नहीं बदली छोटा मालीपाड़ा की तस्वीर, बीमार महिला को माची पर ढोकर लाए ग्रामीण
Big news from Pakur: 75 years after independence, the landscape of Chhota Malipara remains unchanged; villagers carry a sick woman on a machi.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। आज़ादी के 75 साल बाद भी जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखण्ड क्षेत्र के छोटा मालीपाड़ा गांव की हालत जस की तस बनी हुई है। विकास के दावों के बीच यहां की सड़कें आज भी बदहाली की कहानी कहती हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि बीमारों को घर तक लाने–ले जाने के लिए ग्रामीणों को माची और खटिया का सहारा लेना पड़ रहा है। बीते सोमवार को इसी जर्जर सड़क ने एक बीमार महिला को समय पर वाहन से घर लाना नामुमकिन कर दिया। मजबूर परिजनों और ग्रामीणों ने उसे माची पर बैठाया और कंधों पर उठाकर पथरीले, दलदली और गड्ढों से भरे रास्ते को पार कराया। ग्रामीणों का कहना है कि छोटा मालीपाड़ा जाने वाली सड़क वर्षों से खस्ताहाल है। बारिश हो या धूप—सड़क का नाम–ओ–निशान लगभग मिट चुका है। जगह–जगह बड़े गड्ढे, टूटे रास्ते और नुकीले पत्थर लोगों की रोजमर्रा की कठिनाइयों को और बढ़ा देते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक हालात इतने खराब हैं कि एंबुलेंस तो दूर, बाइक तक गांव तक नहीं पहुंच पाती। बरसात में यही कच्चा रास्ता कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे बीमारों, प्रसूता महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल ले जाना अपने आप में जोखिम बन चुका है। कई मरीज रास्ते में ही फंस जाते हैं और उनकी हालत और बिगड़ जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कई बार सड़क मरम्मत की गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार परिणाम शून्य ही रहा। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सड़क निर्माण पर ठोस कदम नहीं उठाए गये, तो वे आन्दोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का साफ कहना है कि “जब तक सड़क नहीं सुधरेगी, हमारी जिंदगी की मुश्किलें खत्म होना मुश्किल है।”



