ललितपुर

बिना ट्रांस्पोर्ट पंजीयन के भाड़े पर फर्राटे भर रहीं ओमिनी और ईको

शिक्षक-शिक्षिकाओं को 60 से 70 किमी दूरी तक लाने-ले जा रहे वाहन

प्रशासन की अनदेखी व एआरटीओ की मनमानी से बढ़ा यह अवैध कारोबार
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जिले की सीमाएं करीबन 60 से 70 किमी के दायरे में फैली हुयी हैं। लिहाजा दूरस्त क्षेत्रों में स्थित परिषदीय विद्यालयों में अध्यापन कार्य कराने के लिए तैनात किये गये शिक्षक-शिक्षिकाएं गांवों में रहकर पठन-पाठन का कार्य तो कराती नहीं होंगी। मुख्यालय में निवासरत कई शिक्षक और शिक्षिकाएं प्रतिदिन निजी या मासिक भाड़े पर चलने वाले वाहनों से आवागमन करतीं हैं। दूरस्त ग्रामीण अंचलों में स्थित परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाओं को लाने-ले जाने के लिए बिना ट्रांस्पोर्ट पंजीयन के दर्जनों वाहन फर्राटे भर रहे हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी सम्बन्धित परिवहन विभाग को न हो, लेकिन कार्यवाही न होने के चलते कई लोग बिना ट्रांस्पोर्ट परमिट के ही निजी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जो कि नियमानुसार भी गलत है और किसी अनहोनी के घटित होने पर कार्यवाहियों में भी खामियां रह जाती हैं। गौरतलब है कि ललितपुर जिले की सीमाएं विकास खण्ड मड़ावरा के दूरस्त लखन्जर-पापरा, महरौनी से सड़कौरा वार्डर और बानपुर के अलावा तालबेहट में झररघाट तक फैली हुयीं हैं। सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाले परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिदिन आवागमन के लिए निजी वाहन या फिर प्राईवेट वाहन को मासिक भाड़े पर किये हुये हैं। मासिक भाड़े में लगे वाहन ट्रांस्पोर्ट के तहत पंजीयन होना अनिवार्य है, जिनकी नम्बर प्लेट पीले रंग की होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है, कुछ लोग अपने निजी वाहन मारूति ओमनी, ईको इत्यादि वाहन को इस कार्य में उपयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं सूत्र बताते हैं कि एक कार में आधा दर्जन से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को उनके विद्यालय तक पहुंचाने और विद्यालय से मुख्यालय तक लाने के नाम पर प्रति माह 4 से 6 हजार रुपये वसूल किये जा रहे हैं। ऐसे में सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा ऐसे वाहनों की नियमित जांच न होने के कारण नियमों की अनदेखी हो रही है।
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