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क्या बनने जा रहा नया सार्क?

भारत को छोड़ पाकिस्तान के साथ जाने को बेताब बांग्लादेश, चीन बना इसका सरपरस्त

ढाका । बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से ही मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान के साथ नजदीकियां बढ़ा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा से लेकर व्यापार तक के क्षेत्र में कई समझौते हुए हैं। अब चीन के नेतृत्व में पाकिस्तान दक्षिण एशिया में एक गठबंधन तैयार करने पर जोर दे रहा है, जिसमें भारत शामिल न हो। अब बांग्लादेश ने ऐसे गठबंधन में दिलचस्पी दिखाई है।
बांग्लादेश में पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद से ही स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं। खासकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश लगातार कट्टरपंथ की तरफ बढ़ा है। आलम यह है कि उसकी विदेश नीति भी भारत से दूर होकर पाकिस्तान पर केंद्रित होती दिख रही है। इसका एक उदाहरण बुधवार को मिला, जब बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह कूटनीतिक तौर पर संभव है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान के उस क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो जाए, जिसमें भारत शामिल नहीं है।
बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी संवाद संस्था (बीएसएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, तौहीद ने कहा कि इस तरह के कूटनीतिक समूह में नेपाल और भूटान का शामिल होना शायद संभव न हो। उन्होंने कहा, यह हमारे लिए (बांग्लादेश के लिए) कूटनीतिक तौर पर संभव है, लेकिन नेपाल और भूटान का पाकिस्तान के साथ किसी समूह में शामिल होना, वह भी जिसमें भारत न हो, के साथ जुड़ना मुमकिन नहीं है।
तौहीद ने कहा कि इशाक डार ने कुछ कहा है और किसी मौके पर इसमें प्रगति भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने मामले पर आगे टिप्पणी से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें ऐसे गठबंधन के बारे में मीडिया से ही जानकारी मिली है।
क्या है पाकिस्तान की तैयारी, जिस पर भारत की करीब से नजर?
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में दावा किया था कि बांग्लादेश-चीन और पाकिस्तान का त्रिपक्षीय गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसे बाकी क्षेत्रीय और क्षेत्र के बाहर की ताकतों को शामिल कर के बढ़ाया जा सकता है।
बता दें कि अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस देश का रुख पाकिस्तान की तरफ नरम हुआ है। बांग्लादेश ने उसी देश के साथ अपने रिश्तों को गहरा करना शुरू कर दिया है, जिसकी सत्ता ने कभी पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला भाषियों पर जुल्म ढाए थे। यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रक्षा, व्यापार, कूटनीतिक और ढाचांगत मामलों से जुड़ी चचार्एं और समझौते हुए हैं।
चीन कैसे बन रहा दक्षिण एशिया में भारत-विरोधी गठबंधन का सरपरस्त?
गौरतलब है कि दक्षिण एशिया में भारत के बिना अलग-अलग देशों के गठबंधन की चचार्ओं को चीन ने ही जोर-शोर से बढ़ाया। इस एवज में चीन ने इस साल जून में एक त्रिपक्षीय बैठक भी रखी थी, जिसमें चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सचिव स्तर के अधिकारियों की मुलाकात हुई थी। इस बैठक को चीन के कुनमिंग में रखा गया था। इसी दौरान ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान और चीन साथ में एक नया क्षेत्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जो कि सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोआॅपेशन) का विकल्प बन सकता है। चूंकि सार्क में भारत सबसे प्रमुख ताकत वाला देश है, इसलिए पाकिस्तान की आवाज इस संगठन में कमजोर पड़ जाती है।
सार्क बीते कुछ वर्षों में पूरी तरह से निष्क्रिय है। 2016 में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों की तरफ से अंजाम दिए गए उड़ी हमले के बाद से ही इस संगठन की प्रमुख बैठकें नहीं हुई हैं। इसी मौके का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने चीन की मदद से दक्षिण एशिया में भारत के बिना एक गठबंधन बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं। चूंकि बांग्लादेश में भी भारत का समर्थन करने वाली शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया, ऐसे में पाकिस्तान को यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिली।

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