पूर्व नक्सली बंदूक छोड़ पकड़ा राजमिस्त्री का करणी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। माओवादकी राह छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट स्थित बरई पंचायत के महबिछुआ ग्राम निवासी पूर्व नक्सली हीरामन गंझू बंदूक छोड़ करणी पकड़ जीवन यापन करने को मजबूर बाप-बेटा,
बाप करणी पकड़ कर पुलिया में पत्थर की जोड़ाई कर रहा है साथ में बेटा नीलकंठ गंझू सीमेंट मिलाकर बाप का हाथ बटा कर सहयोग कर रहा है।
मौके पे नावाडीह सांसद प्रतिनिधि दीपू अग्रवाल ने कहा कि जिस समय सरकार के अधीन अपना आत्म समर्पण किया था उस समय झारखंड राज्य का उदय हुआ था सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री लालचंद महतो के समक्ष भूषण उच्च विद्यालयनावाडीह परिसर में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आया था उसके बाद जेल से रिहा हो कर अपनी प्रथम पुत्री किरण कुमारी उम्र लगभग 31 वर्ष जिसका शादी बिसुनगढ़ प्रखंड के नरकी पंचायत के ग्राम बाजे गांव में किया एवं दूसरी पुत्री मीणा कुमारी उम्र लगभग 27 वर्ष जिसका शादी रामगढ़ जिला के भुरकुंडा के लादी गांव में किया।
एक पुत्र है जिसका नाम नीलकंठ गंझू जो पिता के साथ ही मजदूरी करता है।आर्थिक स्थिति पिता की खराब होने के कारण नवीं कक्षा तक पढ़ाई कर आगे की पढ़ाई छोड़ दिया। जब से हिरामन गंझू आत्मसमर्पण किया है तब से उसका जमीन का रसीद भी नहीं कटा है। इन प्रकार की समस्या को सुन कर दीपू अग्रवाल ने कहा कि अंचल अधिकारी और प्रखंड पदाधिकारी से मिल कर मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपेंगे जब सोरेन सरकार में हिरामन गंझू जैसे परिवार की समस्याएं का निराकरण नहीं किया जाएगा तो किस सरकार से ऐसे लोगों को न्याय मिलेगा वर्तमान सरकार उस समय जितने भी माओवादियों आत्मसमर्पण किया था चिन्हित कर 50-50 लाख रुपए उनके परिवार को दे ।
अन्यथा आवेदन के बाद सरकार इस विषय पे कोई पहल नहीं करेगी तो उनके परिजनों के साथ सांसद प्रतिनिधि दीपू अग्रवाल उसके समर्थन में आंदोलन करेगा।
उपस्थित पुलिया निर्माण कार्य के दौरान महिला पूजा देवी, सुगिया देवी, चांदनी देवी लक्ष्मी देवी, राधा देवी, अन्नू देवी, जीरवा देवी, पुरनी देवी, काव्या कुमारी ने एक स्वर में कहा कि हेमन्त सोरेन सरकार में हिरामन गंझू जैसे परिवार को न्याय नहीं मिलेगा तो किस सरकार में गंझू परिवार उम्मीद करेगी।



