
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों (पुरुष, महिला एवं संयुक्त), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में डॉक्टरों, नर्सों एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने सभी अस्पताल प्रमुखों, मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (सीएमएस) एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति के बिना किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का वेतन भुगतान नहीं किया जाएगा।यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। पहले चरण में 105 जिला अस्पतालों एवं 975 सीएचसी में बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू किया जाएगा, जबकि बाद में इसे सभी पीएचसी तक विस्तारित किया जाएगा। बड़े अस्पतालों में यह सिस्टम पहले से ही मौजूद है, लेकिन अब छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में भी इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस कदम से डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित होगी, लेटलतीफी रुकेगी तथा मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। शिकायतों के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है कि कई जगह स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रहते हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है तथा संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




