बोकारो प्रदूषण विभाग ओर खनिज विभाग ले संज्ञान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। प्रदूषण के मुख्य कारण मानवीय गतिविधियाँ और प्राकृतिक स्रोत हैं, जिनमें औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से निकलने वाला धुआँ (जीवाश्म ईंधन), कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग, प्लास्टिक कचरा, और ठोस ईंधन का जलना शामिल है; ये सभी वायु, जल और मिट्टी को दूषित करते हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ता है।
मानवीय गतिविधियाँ
औद्योगिकरण: कारखानों से निकलने वाली जहरीली गैसें, रासायनिक अपशिष्ट और ठोस कचरा वायु, जल और मिट्टी को प्रदूषित करते हैं।
नावाडीह सांसद प्रतिनिधि दीपू अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के बाद एक्शन में सरकार सरकारी ओर प्राइवेट दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारी को घर से काम करने का आदेश जारी किया है। वहीं वर्ग नौवीं तक और वर्ग 11 वीं के छात्रों के लिए तत्काल प्रभाव से स्कूली बच्चे को हाइब्रिड मोड में आयोजित करने को कहा है । ऐसा प्रभाव बोकारो जिला में न हो इसलिए बोकारो जिला के सभी कॉल फेक्ट्री की जांच कर उचित कारवाई करे चूंकि नावाडीह प्रखण्ड के चिरूडीह में रूबी कॉल फेक्टरी, ऊपरघाट के पलामू पंचायत रामाहरिया कॉल फेक्टरी में दिन रात जमीन में अवैध कोयला का बड़ा-बड़ा भट्टा लगा कर भारी मात्रा में प्रदूषण फैलाया जा रहा है जो बिल्कुल उचित नहीं है ऐसा प्रतीत होता है क्षेत्र में की खनिज विभाग ओर प्रदूषण विभाग की अधिकारी गहरी नींद पे सो कर सरकार के खजाने को लुटवाने में कोयला माफिया का मदद कर रहे हैं। हॉल ही में अंचल अधिकारी अभिषेक कुमार ओर थाना प्रभारी नीतीश कुमार को कई बार सूचना दे चुका हूं और वॉट्सएप के माध्यम से खनिज विभाग के अधिकारी सीताराम जी को भी अवैध खनन की सूचना दे चुका हूं लेकिन कोई भी उचित कारवाई नहीं की गई है ।
ऐसा भी आप सब अधिकारी गण न करे जिससे क़ानून से बिस्वास भी जनता का उठ जाए,
बोकारो की चेयरमैन ओर स्थानीय जिला परिषद के द्वारा फैक्ट्री में चल रहे अवैध कोयला के खिलाफ़ आवाज़ उठाने पे भी अभी तक फैक्ट्री संचालित किस आधार पे है। प्रशासन को खबर के माध्यम से कहना चाहता हूं कि स्कूल से 200 मीटर की दूरी पर प्रदूषण पेपर किस आधार पे उपलब्ध करवाया गया जिस जगह पे फैक्ट्री के जमीन में अनेकों जगह कोयला का भंडारण कर पोडा किया जा रहा है वहां उससे कुछ ही दूरी पर नन्हे बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते है आने वाले दिनों में बच्चों का भविष्य किया होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं।
अगर प्रदूषण पेपर फैक्ट्री को उपलब्ध नहीं है तो फेक्ट्री पे ताला लगा कर सिल करे । क्योंकि दिल्ली की तरह ऑनलाइन क्लासेज, कर्मचारियों को वर्क फॉम होम की सुविधा करवा पाना झारखंड में मुश्किल होगा ।



