बागपत
“36 साल आँखों में रोशनी भरने वाले हाथ — डॉ सुखपाल सिंह से खास मुलाक़ात”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत
प्रश्न 1: डॉक्टर साहब, 36 वर्षों का सफ़र… सबसे पहले मन में क्या आता है?
डॉ सुखपाल सिंह:
जब कोई मरीज ऑपरेशन के बाद पहली बार मुझे देखता है और कहता है — “डॉक्टर साहब, अब मैं साफ़ देख पा रहा हूँ”, उसी पल लगता है कि जिंदगी का हर संघर्ष सफल हो गया। इन 36 वर्षों में मैंने सिर्फ आँखें नहीं खोलीं, बहुतों की उम्मीदें और रास्ते भी रोशन किए हैं।
प्रश्न 2: डॉक्टर बनने का सपना कैसे जागा?
डॉ सुखपाल सिंह:
मेरे गाँव में एक बुजुर्ग थे जिनकी आँखें मोतियाबिंद से कमजोर हो गई थीं। अस्पताल दूर था और वक्त पर इलाज नहीं मिला।
उनकी असहाय नज़रों ने मुझे अंदर तक हिला दिया।
उसी दिन ठान लिया — “मैं आँखों का डॉक्टर बनूंगा, ताकि रोशनी किसी के लिए दूरी का सौदा न बने।”
प्रश्न 3: आपकी नज़र में ‘एxperience’ का असली मतलब क्या है?
डॉ सुखपाल सिंह:
डिग्री से डॉक्टर बना जाता है…
लेकिन अनुभव से इंसान मरीज का दर्द समझता है।
मरीज दवाई से ठीक होता है,
पर भरोसे से जुड़ता है।
प्रश्न 4: पिछले 36 सालों में आँखों के इलाज में सबसे बड़ा बदलाव क्या आया?
डॉ सुखपाल सिंह:
पहले सर्जरी के बाद मरीज कई दिनों तक पट्टी बाँध कर रहते थे।
आज लेज़र तकनीक ने ऑपरेशन को फास्ट, सुरक्षित और बिना दर्द बना दिया है।
मैंने ऑपरेशन थिएटर को हाथ से चलाई मशीनों से लेकर रोबोटिक तकनीक तक जाते देखा है।
ये सिर्फ बदलाव नहीं—एक क्रांति है।
प्रश्न 5: डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसा कैसे बनता है?
डॉ सुखपाल सिंह:
सुनने से।
मरीज बीमारी से ज्यादा नज़रअंदाज़ होने से टूटता है।
मैं कोशिश करता हूँ पहले उसे सुनूँ, फिर इलाज करूँ।
कई बार एक सुकून भरा जवाब दवाई से ज्यादा असर करता है।
प्रश्न 6: डॉक्टर साहब, कोई ऐसा पल जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे?
डॉ सुखपाल सिंह:
एक बच्ची का ऑपरेशन हुआ था — करीब 9 साल की थी।
ऑपरेशन सफल रहा और उसने पहली बार अपनी माँ को साफ देखा…
वो दौड़कर बोली — “माँ, तुम लाल रंग की चुन्नी पहनती हो…”
उस पल मेरी आँखें भी नम हो गईं।
कभी-कभी डॉक्टर रोता भी है — खुशी से।
प्रश्न 7: युवाओं के लिए आपका संदेश?
डॉ सुखपाल सिंह:
डिग्री के पीछे मत भागो…
कौशल, विनम्रता और इंसानियत — ये तुम्हें वहाँ ले जाएँगे जहाँ डिग्री भी नहीं ले जा सकती।
काम ऐसा करो कि लोग तुम्हें डॉक्टर नाम से नहीं, डॉक्टर दिल से याद करें।
प्रश्न 8: अगले 10 सालों में आपकी आँख क्या देखना चाहती है?
डॉ सुखपाल सिंह:
ग्रामीण भारत में ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएँ जहाँ दूरी, पैसे या जानकारी की कमी किसी को अँधेरे में न रखे।
मैं रोशनी हर गाँव तक पहुँचते देखना चाहता हूँ।
अंत में…
36 वर्षों से आँखों में उजाला भरते डॉ सुखपाल सिंह सिर्फ आई स्पेशलिस्ट नहीं—
रोशनी के रखवाले हैं।
किसी की दृष्टि लौटाकर उन्होंने न सिर्फ आँखें खोलीं…
बल्कि अनगिनत ज़िंदगियों में फिर से सुबह कर दी।



