बेतुल

बैतूल अन्नदाता त्रस्त प्रशासन पस्त  राजनेता मस्त ।

प्रशासन की लाचार व्यवस्था से ठंड में ठिठुरने को मजबूर किसान।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल वैसे तो खुद को किसान हितेषी कहने वाली राजनैतिक पार्टियां सिर्फ किसानों के नाम पर सिर्फ अपनी राजनीति चमकाती है वास्तव में किसानों की कोई फिक्र नहीं है  महीनों रात दिन अंधेरे जहरीले सांप बिच्छू से लड़कर  किसान अपनी फसल पालता है  फिर मंडी में अपनी फसल को बेचने के लिए रात भर अनाज से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पर रूह कपाने वाली ठंड में ठिठुरने को मजबूर हो रहा है किसानों की सुध लेने को  ना कोई अधिकारी  है ना किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले नेता  सभी पार्टियों ने  किसानों के नाम पर किसान मोर्चा बना रखा है जो सिर्फ नाम का है किसानों के हित में कभी कही भी खड़ा नजर नहीं आता  अखबारों में  कई बार खबरें प्रकाशित होने पर भी कोई सुधार नहीं आया कलेक्टर साहब का निरक्षण सिर्फ खाना पूर्ति ही नजर आता है क्योंकि कलेक्टर साहब के निर्देशों को भी  मंडी प्रशासन कोई तवज्जो नहीं देता समस्या  जैसे कि वैसी ही बनी है  चौक चौराहो पर ये चर्चा गर्म है कि मंडी प्रांगण में इतनी लापरवाही सामने आने के बावजूद जिले के तेजतर्रार कलेक्टर साहब मंडी सचिव पर कारवाही करने से क्यों डर रहे है क्या कारण है कि आजतक सचिव पर कोई भी कारवाही नहीं की गई।समस्या को लेकर जागरूक किसानों ने  मंडी सचिव को कई बार फोन किया गया परन्तु वे कभी फोन नहीं उठाते नाराज किसानों ने कहा जब आपको किसानों की समस्या सुननी ही नहीं तो इस्तीफा देदो ।
 आठनेर क्षेत्र से अपनी फसल लेकर आए किसान जयप्रकाश ने बताया कि रात भर से मंडी के बाहर अपनी फसल की सुरक्षा के लिए टैक्टर पर ही बैठा  रहा ठंड की वजह से तबियत बिगड़ गई। प्रशासन द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई सैकड़ों की संख्या में किसान ठंड में ठिठुरते है   कमसे कम अलाव ही जलवा दे  ।
एक और किसान ने बताया कि रात भर ठंड में ठिठुर कर जैसे तैसे अपनी गाड़ी मंडी में पहुंचा कर फसल खाली होते ही गाड़ी बाहर निकलने का दबाव बनाया जाता है मंडी से बाहर नहीं ले जाने पर हवा निकालने की धमकी दी जाती है अब खाली गाड़ी बाहर कहा खड़ी करे कोई व्यवस्था नहीं है बाहर दुकानों के सामने दुकानदार लगाने नहीं देते  सड़क किनारे लगाओ तो यातायात पुलिस द्वारा चालानी कार्यवाही कर दी जाती है अब किसान अपना  वाहन कहा खड़ा करे  इसकी व्यवस्था भी तो प्रशासन की  जिम्मेदारी है। जिले में दोनों पार्टी  के किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष भी है परंतु वे भी अपनी आंखे मूंदे हुए है। किसानों की इतनी बड़ी परेशानी उन्हें नजर नहीं आती । किसानों के मामले में पक्ष विपक्ष दोनों का खामोश रहने से  किसानों में भारी आक्रोश है और यह आक्रोश बहुत जल्द किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगा ।
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