गाजियाबाद
लोनी में पुलिसिया बर्बरता का आरोप
चौकी इंचार्ज पर थ्री-व्हीलर चालक से मारपीट, नकद ₹21,000 और मोबाइल कब्जे में लेने का आरोप

पीड़ित बोले— न्याय के लिए मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग की चौखट खटखटाएँगे
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी। थ्री-व्हीलर चालक के साथ हुई कथित पुलिसिया बर्बरता का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि तिराहा चौकी इंचार्ज और कुछ पुलिस कर्मियों ने चालक को न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि तलाशी के दौरान उसका मोबाइल फोन और ₹21,000 नकद भी अपने कब्जे में ले लिए। परिजनों का कहना है कि चौकी पर ले जाने के बाद भी मारपीट जारी रही—मानो कानून नहीं, डंडा ही व्यवस्था की नई परिभाषा बन चुका हो।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मानवता और संवेदना को दरकिनार करते हुए पुलिस कर्मियों ने उस पर ऐसा ज़ुल्म ढाया, जिसे सुनकर रूह कांप जाती है। सवाल यह उठता है कि क्या कानून व्यवस्था कायम रखने के नाम पर अवैध वसूली की “नई परंपरा” ने वर्दी की गरिमा को भी गिरवी रख दिया है?
पीड़ित पक्ष का कहना है कि चालक को पहले तो नियमों के उल्लंघन के नाम पर गिरफ्तार किया गया, ऑटो सीज़ कर दिया गया, और फिर “ताक़त के प्रदर्शन” के लिए चौकी पर दोबारा पिटाई की गई। परिजन तंज़ करते हुए कहते हैं—
“शायद इंसाफ़ की जगह डंडा-राज ही अब कानून की असली परिभाषा बची रह गई है!”
पीड़ित ने घोषणा की है कि वह मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग, राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार तक अपनी गुहार पहुँचाएगा, ताकि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय नहीं, सिर्फ़ न्याय की कोशिश का अधिकार ही अबतक नसीब हुआ है।
इस बीच, चौकी इंचार्ज रविंद्र सिंह ने चालक के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात तो स्वीकार की, लेकिन मारपीट और नकदी व मोबाइल कब्जे में लेने के आरोपों से इंकार किया। जबकि पीड़ित पक्ष का कहना है कि सच्चाई सामने आने पर कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह घटना पुलिस व्यवस्था पर एक और काला धब्बा बनकर रह जाएगी—और जनता का विश्वास सिर्फ़ कागज़ी नारे बनकर रह जाएगा


