मेरठ

बेरोज़गारी नहीं, अवसर चाहिए: युवा शक्ति का सशक्तिकरण

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

मेरठ : भारत की असली ताकत उसकी युवा आबादी है। वर्ष 2025 में देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह आंकड़ा किसी भी राष्ट्र के लिए गर्व का विषय हो सकता है, लेकिन आज यही युवा शक्ति एक गंभीर संकट से जूझ रही है—बेरोज़गारी और कौशल की कमी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की मई 2025 की रिपोर्ट बताती है कि जहां कुल बेरोज़गारी दर 5.6 प्रतिशत है, वहीं 15 से 29 वर्ष के युवाओं में यह दर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक असंतोष और भविष्य की अनिश्चितता का संकेत है।

समस्या की जड़ शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई है। हर साल लाखों युवा डिग्री लेकर कॉलेजों से निकलते हैं, लेकिन इंडियाज़ ग्रेजुएट स्किल्स इंडेक्स 2025 के अनुसार 57 प्रतिशत स्नातक नौकरी योग्य कौशल से वंचित हैं। यानी डिग्री है, लेकिन हुनर नहीं। यह स्थिति केवल तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि संचार कौशल, डिजिटल साक्षरता, समस्या समाधान और टीमवर्क जैसी बुनियादी क्षमताओं में भी साफ दिखाई देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संकट और गहरा है, जहां केवल 10 प्रतिशत युवाओं को ही औपचारिक कौशल प्रशिक्षण मिल पाया है। महिलाओं की भागीदारी भी चिंताजनक है—उनमें बेरोज़गारी दर अधिक है, जबकि अवसर सीमित हैं।

इसके कई कारण हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली आज भी अंकों और रटंत विद्या पर केंद्रित है, जबकि उद्योग को व्यावहारिक और व्यवहारिक कौशल चाहिए। ग्रामीण-शहरी असमानता, तेज़ी से बदलती तकनीक, ऑटोमेशन और सामाजिक सोच भी इस संकट को बढ़ा रही है। आज भी कई परिवार डिग्री को ही सफलता का पैमाना मानते हैं, जबकि असली सफलता समय के साथ नए हुनर सीखने में है।

सरकार ने स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और इंटर्नशिप कार्यक्रम जैसे कई प्रयास किए हैं, लेकिन इनकी पहुंच और प्रभाव अभी पर्याप्त नहीं है, खासकर ग्रामीण और वंचित वर्गों तक।

इसलिए समाधान केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। समाज के हर व्यक्ति की इसमें भूमिका है। माता-पिता, शिक्षक और नागरिक—सभी को युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार योग्य बनाना होगा। घर से ही आत्मनिर्भरता, संवाद कौशल, डिजिटल साक्षरता और समस्या समाधान की आदत डालनी होगी। स्थानीय स्तर पर करियर काउंसलिंग, कार्यशालाएं, निःशुल्क प्रशिक्षण और डिजिटल लर्निंग केंद्र शुरू किए जा सकते हैं। जिनके पास कोई हुनर है, वे उसे दूसरों तक पहुंचाएं।

याद रखिए, एक छोटा-सा प्रयास भी किसी युवा का भविष्य बदल सकता है। भारत को आज बेरोज़गार नहीं, बल्कि हुनरमंद, आत्मनिर्भर और अवसरों से लैस युवा चाहिए। यही सच्चा राष्ट्रनिर्माण है।

 
शिवानी रोहिला
विभागाध्यक्ष
कंप्यूटर विज्ञान विभाग, एमआईईटी – मेरठ
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