
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। जनजाति क्षेत्र के गड़ीखेड़ा सिल्लौट में बोरी बंधान कर जल संवर्धन और भूजल संरक्षण का सराहनीय कार्य किया गया। इस पहल से गांव का पानी गांव में रुकने के साथ कुएं, ट्यूबवेल और प्राकृतिक जलस्रोतों के जलस्तर में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है।
जनजाति क्षेत्र की शिक्षा विद्या मध्य भारत प्रान्त, जिला बैतूल के संकुल भारत भारती अंतर्गत उपसंकुल भारत भारती के सरस्वती संस्कार केंद्र गड़ीखेड़ा सिल्लौट में बोरी बंधान का कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हरीश शर्मा, भाऊराव देवरस सेवान्यास के सचिव एवं इंजीनियर, रूपसिंह जी लोहाने प्रान्त प्रमुख जनजाति क्षेत्र की शिक्षा मध्य भारत प्रान्त, मा. पूरनलाल परते भाऊराव देवरस सेवान्यास के सदस्य एवं शासकीय शिक्षक, नागोराव सिरसाम जिला प्रमुख जनजाति क्षेत्र की शिक्षा जिला बैतूल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जोधा कुमार धुर्वे संकुल प्रमुख घोड़ाडोंगरी, रितेश जी परते, सुंदरलाल इवने, श्रीमती वंदना लिखितकर दीदी संकुल प्रमुख कोलगांव, रामभरोश जी पन्द्राम संकुल प्रमुख भारत भारती, पप्पु जी परते उपसंकुल प्रमुख घानाचिखली, सावल उइके उपसंकुल प्रमुख भारत भारती, संयोजक मंडल के सदस्य, आचार्य दीदी, ग्राम के सरपंच, उपसरपंच एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी भैया-बहन उपस्थित रहे।
अतिथियों का गाजे-बाजे के साथ स्वागत कर मंदिर दर्शन करवाया गया, इसके बाद जल देवता की पूजा कर बोरी बंधान कार्य प्रारंभ किया गया। लगभग 200 बोरियों का बंधान बनाया गया, जिससे कुएं और ट्यूबवेल का जलस्तर बढ़ेगा तथा पशु-पक्षियों को भी पानी उपलब्ध होगा। हरीश शर्मा ने बोरी बंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांव का पानी गांव में और नदी का पानी रेत में रहेगा तो जलस्तर बढ़ेगा और आसपास के किसानों को सिंचाई में लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में गोपाल वट्टी ने आभार व्यक्त किया।



