सिंगरौली

विवादों के बीच सुंदरलाल शाह का एक साल, संगठन मजबूत या भीतर से कमजोर?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुंदरलाल शाह को सिंगरौली संगठन की कमान संभाले एक वर्ष पूरा हो चुका है। यह एक साल जहां संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यक्रमों के नाम रहा, वहीं दूसरी ओर विवाद, आरोप-प्रत्यारोप, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मंडल अध्यक्षों के टकराव के कारण लगातार चर्चा में भी बना रहा।
पार्टी नेतृत्व ने सुंदरलाल शाह पर भरोसा जताते हुए उन्हें जिले की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन बीते एक साल में संगठन के भीतर उठी असंतोष की लहर ने उनके कार्यकाल को आसान नहीं रहने दिया।
कार्यकर्ताओं में असंतोष, संगठन में खींचतान
भाजपा के कई पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का आरोप है कि संगठन में फैसले सीमित लोगों तक सिमट गए हैं। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, नियुक्तियों में भेदभाव और संवाद की कमी जैसे मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
कुछ मंडलों में अध्यक्ष पद को लेकर उपजे विवाद ने भी जिला नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया है। मंडल अध्यक्षों के चयन और हटाने को लेकर विरोध, धरना-प्रदर्शन और अंदरूनी शिकायतों ने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं।
अंदरूनी सत्ता संघर्ष भी बना चर्चा का विषय
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि भाजपा संगठन के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। जिला नेतृत्व, वरिष्ठ नेताओं और मंडल स्तर के पदाधिकारियों के बीच तालमेल की कमी कई बार खुलकर सामने आई है।
इस्तीफे, नाराजगी भरे बयान और संगठनात्मक बैठकों में तीखी बहस इस बात का संकेत देती है कि पार्टी के अंदर सत्ता और प्रभाव को लेकर खींचतान चल रही है।
समर्थकों का दावा – संगठन को दी नई दिशा
हालांकि, सुंदरलाल शाह के समर्थक उनके कार्यकाल को सकारात्मक बताते हैं। उनका कहना है कि संगठन को गांव-गांव तक सक्रिय करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में जिला अध्यक्ष ने सक्रिय भूमिका निभाई है।
समर्थकों के अनुसार, बड़े संगठन में मतभेद स्वाभाविक हैं और इन्हें विवाद नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।
एक साल का निष्कर्ष -उपलब्धि कम, चुनौतियां ज्यादा
कुल मिलाकर सुंदरलाल शाह का एक वर्ष का कार्यकाल उपलब्धियों से ज्यादा चुनौतियों और विवादों के कारण चर्चा में रहा। संगठन को एकजुट रखने, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और मंडल स्तर के विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी आने वाले समय में उनके सामने सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
अब देखना यह होगा कि जिला अध्यक्ष अपने दूसरे वर्ष में संगठन को मजबूती की दिशा में ले जाते हैं या फिर भाजपा की अंदरूनी खींचतान सिंगरौली की राजनीति को और अस्थिर करती है।
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