
खेतों के बीच से गुजरने वाले शासकीय मार्ग पर कब्जे का आरोप
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। तहसील बैतूल के ग्राम हमलापुर में वर्षों पुराने शासकीय मेंढ़ा और रास्ते को लेकर विवाद सामने आया है। ग्राम हमलापुर निवासी बलवंत पिता मायदू उम्र 65 वर्ष और कालूराम पिता मायदू उम्र 55 वर्ष ने कलेक्टर और तहसीलदार बैतूल को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि से लगे शासकीय मेंढ़ा और मार्ग पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। आवेदकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण, खुदाई और सीमांकन पर रोक लगाने की मांग की है।
आवेदकों के अनुसार उनकी भूमि खसरा नंबर 100/1, 100/2, 98/3 और 99 से लगा शासकीय मेंढ़ा और रास्ता करीब 50 वर्षों से अस्तित्व में है, जो राजस्व नक्शे में भी दर्ज है। इस शासकीय मेंढ़ा का उपयोग 15 से 20 कृषक अपने खेतों में आने-जाने के लिए करते हैं और इसके अलावा क्षेत्र में कोई अन्य शासकीय मार्ग उपलब्ध नहीं है। कालूराम की पत्नी शकुन बाई की भूमि खसरा नंबर 99 रकबा 3 एकड़ 65 डिस्मिल तथा बलवंत की भूमि खसरा नंबर 100 और 100/1 रकबा 4 एकड़ 60 डिस्मिल इसी मेंढ़ा से लगी हुई है। वर्तमान में सभी किसानों की गन्ने की फसल खेतों में खड़ी है।
– खुटी गाड़कर दिखाया जा रहा अवैध अतिक्रमण
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अनावेदकों द्वारा पटवारी और राजस्व निरीक्षक से मिलीभगत कर आवेदकों की भूमि में खुटी गाड़कर अवैध अतिक्रमण दिखाया जा रहा है। आरोप है कि अनावेदकगण शासकीय मेंढ़ा और आवेदकों की निजी भूमि को शासकीय मेंढ़ा बताकर जेसीबी मशीन से खुदाई करने की तैयारी में हैं।
– दबाव बनाकर रास्ता बंद करने की धमकी
आवेदकों का कहना है कि अनावेदक 20 से 25 लोगों के साथ दबाव बनाकर रास्ता बंद करने की धमकी दे रहे हैं। दिनांक 23 मई 2025 को उमरी की पटवारी और राजस्व निरीक्षक को मौके पर लाकर मुरम और पत्थर डलवाए गए। जबकि खसरा नंबर 100/2 और 99 से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित है। यदि शासकीय मेंढ़ा बंद किया गया तो किसानों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाएगा और भविष्य में गंभीर समस्या उत्पन्न होगी।
प्रशासन से मांग की गई है कि शासकीय मेंढ़ा और रास्ते पर किसी भी प्रकार की खुदाई, निर्माण और कब्जे की कार्रवाई को तत्काल रोका जाए, सीमांकन पर भी रोक लगाई जाए और किसानों के आवागमन को सुरक्षित रखा जाए ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। ज्ञापन देने वालों में किसान कालूराम पवार, मुन्ना यादव, बलवंत पवार, शशांक पवार, सुनील यादव, पुष्पराज यादव, भिखारी सहित अन्य कृषक शामिल रहे।



