सिंगरौली

अगर गरीब का बेटा होता तो अब तक जेल में होता

करोड़पति आरोपी ‘फरार’, लेकिन सीएसपी के पीछे खड़ा सिंगरौली पुलिस पर गंभीर सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। सिंगरौली में कानून का तराजू किस ओर झुका है, इसका एक और शर्मनाक उदाहरण सामने आया है। सवाल सीधा है क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए है? क्योंकि अगर यही आरोपी किसी गरीब परिवार से होता, तो सात साल से कम सजा वाले मामले में भी पुलिस उसे कब का “अपराध पंजीबद्ध कर जेल” भेज चुकी होती। लेकिन जब मामला करोड़पति, रसूखदार और सत्ता से जुड़े व्यापारी का हो, तो वही पुलिस उसे “फरार” बताकर आंखें मूंद लेती है।
नवानगर थाना से प्राप्त आरटीआई जवाब ने पुलिस की इस दोहरी कार्यप्रणाली को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। निगाही क्षेत्र स्थित सीएचपी में श्रमिकों के साथ कथित अन्याय के मामले में नामजद आरोपी एसडी सिंह (एसडी सिंह कंस्ट्रक्शन) को पुलिस आज तक “पता तलाश में” बता रही है।
हैरानी की बात यह है कि वही तथाकथित फरार आरोपी सीएसपी विंध्यनगर के ठीक पीछे खड़ा होकर पुलिस से बातचीत करता देखा गया। सवाल उठता है जो व्यक्ति पुलिस अफसरों के साथ खुलेआम खड़ा है, वह फरार कैसे?
आरटीआई का जवाब और हकीकत दोनों में जमीन-आसमान का फर्क
नवानगर थाना द्वारा आरटीआई में स्वीकार किया गया है कि—
घटनास्थल का निरीक्षण हो चुका है नजरी नक्शा तैयार किया गया फरियादी व आवेदकों के बयान दर्ज किए गए कंपनी को सूचना भी दे दी गई किन जब बात गिरफ्तारी की आई, तो कानून अचानक लाचार हो गया।
आरटीआई में “पता तलाश जारी” बताए गए आरोपी हैं—
1. एस.डी सिंह
2. अनूप सिंह
3. बसीम अकरण
4. सुनील सिंह
5. आशीष राणा
पुलिस दावा करती है कि “शीघ्र गिरफ्तारी होगी”, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि मुख्य आरोपी सत्ता और पुलिस संरक्षण में बेखौफ घूम रहा है।
गरीब पर कानून का डंडा, रसूखदार पर कानून मेहमान
स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि सिंगरौली में गिरफ्तारी अपराध देखकर नहीं, बल्कि पहुंच देखकर होती है।
अगर कोई गरीब युवक जरा-सी गलती कर दे, तो पुलिस रातों-रात जेल भेज देती है।
अगर कोई गरीब महिला जहर खा ले, तो पूरा प्रशासन इधर-उधर दौड़ पड़ता है, रविवार को स्कूल तक खुलवा दिए जाते हैं।
लेकिन यहां एक नामजद आरोपी, जिसे “फरार” बताया जा रहा है, पुलिस अफसरों के साथ खड़ा होकर ज्ञान बांट रहा है—और गिरफ्तारी शून्य।
जानबूझकर ‘फरार’ लिखा गया?
यह तस्वीर और आरटीआई जवाब इस आशंका को मजबूत करते हैं कि आरोपी को जानबूझकर फरार बताया जा रहा है, ताकि उसकी गिरफ्तारी न करनी पड़े।
यह कोई लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक संरक्षण का मामला प्रतीत होता है।
पुलिस महानिदेशक से सीधा आग्रह
यह मामला अब सिर्फ एक थाने या एक जिले का नहीं रहा। यह मध्य प्रदेश पुलिस की साख से जुड़ चुका है।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से आग्रह है कि—
सिंगरौली में चल रहे इस दोहरे कानून पर तत्काल रोक लगाई जाए यह तय किया जाए कि गिरफ्तारी अपराध से होगी या सत्ता से और अगर थोड़ी-सी भी जवाबदेही बची है, तो एसडी सिंह को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, क्योंकि वह कोई “दूर छिपा हुआ” नहीं, बल्कि सीएसपी के पीछे ही खड़ा है
अब सवाल यही है—
कागजों में तलाश चलेगी या जमीन पर कानून चलेगा?
सिंगरौली इसका जवाब मांग रही है।
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