
महाराजा विजेन्द्रसिंह ने पता किया रहस्य
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
भरतपुर-अलवर-दौसा जिला की सीमा पर भुसावर के उपखण्ड के गांव पथैना से करीब दो किमी दूर काला पहाड की तलहटी में स्थित श्री धनेरी गुफा वाला हनुमान आस्था का केन्द्र है,जो भगवान श्री कृष्ण-वलराम युग की है,यहां हिसंक जंगली जानवरों का बसेरा है और मयूर-वानरों की स्थली है। प्रतिदिन भारी सख्यां में सन्त एवं श्रद्वालुं दर्शन को आते है। क्षेत्र के बुर्जग लोगों का कहना है कि भगवान श्री कृष्ण-वलराम मथुरापुरी को छोड कर द्वारिकाधाम इसी गुफा के माध्यम से गए,ये गुफा विश्वकर्मा द्वारा निर्मित है। काला पहाड एवं गुफा को लेकर अनेक किदवंतियां है,जिन पर सन्त एवं श्रद्वालुं आज भी विश्वास करते है। काला पहाड एवं गुफा की राजस्थान सहित अन्य प्रान्त के लोग पूर्णिमा एवं अमावश्या को लोग दर्शन एवं परिक्रमा देने आते है और मनोकामनाए पूरी होने पर गोठ का आयोजन कर प्रसादी वितरण करते है।
——गोर्वधन का है काला पहाड लघु भ्राता
गांव पथैना के निवासी पूर्व प्रधान ठाकुर भूपेंद्र सिंह,रॉकी उर्फ राकेश ,कौशल फौजदार ,सूबेदार मेजर हरभजन सिंह ,दिगंबर फौजी ने बताया कि काला पहाड भी ब्रज की धरोहर है,जो गोर्वधन पर्वत का लघु भ्राता कहलाता है। जिसको लेकर किदवंती है कि भगवान
गंाव पथैना के ग्रामीणों ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस के वध किए जाने बाद कंस का साला जरासन्द ने श्रीकृष्ण से बदला लेने को कई बार मथुरापुरी पर आक्रमण किए,लेकिन जरासन्द का मरण भगवान श्रीकृष्ण-वलराम के हाथ नही था,जिसको लेकर श्रीकृष्ण-वलराम की हलैना के पास वनखण्डी आश्रम पर मंथना हुई और मथुरापुरी छोड कर द्वारिकापुरी बसाने का निर्णय लिया। दोनो भाई सहित यादव सेना ने जरासन्द को चकमा दिया और काला पहाड की गुफा के माध्यम द्वारिकापुरी पहुंच गए,जरासन्द ने समझा कि दोनो भाई सेना सहित गुफा में छुपे हुए है,जिस गुफा में जरासन्द ने आग लगा और उसने समझा कि ये लोग आग में जल गए। आग से पहाड जल कर काला हो गया। जो पहाड आज भी काला है आज भी काला पहाड के नाम से जानते है।——सवा सौ मन सरसो तेल जला
भरतपुर रियासत के महाराजा विजेन्द्रसिंह ने वर्ष 1946–47 में काला पहाड की गुफा का रहस्य जानने के लिए करीब सवा सौ मन सरसों का तेल जलवाया और उसके बाद भी गुफा का रहस्य आज तक नही खुला। गांव पथैना निवासी सत्येन्द्रसिंह एवं शिवओम गुप्ता ने बताया कि महाराजा विजेन्द्रसिंह एक बार पथैना आए,गांव के लोगों ने गुफा का रहस्य बताया और कहा कि रात्रि के समय गुफा के अन्दर से झालर-घन्टा सहित हिंसक जानवरों की आवाज आती है। महाराजा विजेन्द्रसिंह ने उसी समय सेना के जवान और गांव के लोग गुफा के रहस्य को चिन्हित किए,जो सवा सौ मन सरसों तेल की मशाल जला कर गुफा के अन्दर प्रवेश किए,जो आज तक नही आए। अब गांव के लोगों ने गुफा के मुख्य दरवाजा पर दीवार चिनवा दी। दरवाजा के पास प्राचीन हनुमान की प्रतिमा है,जिसके दर्शन को सन्त एवं लोग आते है ।



