
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : पुलिस प्रशासन, खनन विभाग और राजस्व विभाग की आपसी सांठगांठ के चलते पचायरा यमुना नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन का खेल खुलेआम जारी है। हालात यह हैं कि खनन माफिया और प्रशासन के बीच लुका-छिपी का खेल खेला जा रहा है। मजबूरी में जब कभी अधिकारियों को खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करनी भी पड़ती है, तो छापामारी से पहले ही संबंधित लोगों तक टीम के पहुंचने की सूचना पहुंच जाती है। नतीजतन माफिया अपनी मशीनें और वाहन लेकर मौके से फरार हो जाते हैं।
बीते दिन एडीएम और खनन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर खनन से सम्बंधित मामले की जांच की। जांच के समय रेत खनन का कार्य पूरी तरह बंद मिला। इसके बाद पुलिस प्रशासन, खनन विभाग और राजस्व विभाग ने अपनी-अपनी पीठ थपथपाई और मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
हालांकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई। अधिकारियों के गाजियाबाद पहुंचने से पहले ही दिन के उजाले में दोबारा रेत खनन का कार्य शुरू हो गया। इससे साफ प्रतीत होता है कि खनन माफिया को प्रशासनिक कार्रवाई की पूर्व सूचना मिल रही है।
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि खनन माफिया से सांठगांठ और अवैध वसूली के चलते ही इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बताया जाता है कि पुलिस, राजस्व विभाग और खनन विभाग के अधिकारियों तक प्रति सप्ताह मोटी रकम पहुंचने की चर्चा आम है। कार्रवाई के अभाव में इन चर्चाओं को और बल मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि अखबारों की सुर्खियां बनने के बावजूद भी अधिकारियों की नजर इस गंभीर समस्या पर नहीं पड़ रही है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कहीं अधिकारियों की आंखों पर वसूली का चश्मा तो नहीं चढ़ा हुआ है।
अवैध रेत खनन से सबसे ज्यादा परेशान किसान और आम आदमी हैं। भारी-भरकम डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत खराब हो चुकी है। आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इस संबंध में थानों में शिकायतें भी पहुंचती हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय वे शिकायतें थाने के डस्टबिन की शोभा बढ़ा रही हैं।
क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि अवैध रेत खनन पर वास्तविक और सख्त कार्रवाई की जाए, दोषी अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो और आम जनता को इस समस्या से निजात दिलाई जाए, ताकि कानून का डर माफियाओं में नजर आए, न कि प्रशासन को


