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गाजा में शांति पहल के लिए भारत को न्योता

ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का दिया प्रस्ताव

वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा के लिए बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता दिया है। यह बोर्ड गाजा में शांति, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए ट्रंप की 20-सूत्रीय योजना का हिस्सा है। ऐसे में सवाल है खड़ा हो रहा कि क्या भारत इस वैश्विक शांति पहल में शामिल होकर पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका और मजबूत करेगा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में शांति बहाली के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। अमेरिका इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बता दें कि भारत को यह न्योता उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और शांति प्रयासों में भूमिका को देखते हुए दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बोर्ड में शामिल देश गाजा की स्थिति पर नजर रखेंगे, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और संघर्ष रोकने से जुड़े कदमों पर विचार करेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
क्या है बोर्ड ऑफ पीस?
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिनमें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा
ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर
अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन
अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल
इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।
अब समझिए बोर्ड की जिम्मेदारी क्या होगी?
व्हाइट हाउस ने बताया कि बोर्ड के सदस्य गाजा से जुड़े कई अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जैसे कि प्रशासन और शासन व्यवस्था को मजबूत करना, क्षेत्रीय देशों से रिश्ते सुधारना, गाजा का पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है।
गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए चुकाने पड़ सकते हैं एक अरब डॉलर
गौरतलब है कि गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को एक अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड को संस्थापक अध्यक्ष होंगे। मसौदा पत्र के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्षों से ज्यादा नहीं होगा। सदस्यता के नवीनीकरण का मसला अध्यक्ष पर निर्भर करेगा।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट के भ्रामक बताया है। उसने कहा कि बोर्ड में शामिल होने के लिए न्यूनतम फीस निर्धारित नहीं की गई है। व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह बस उन साझेदार देशों को स्थायी सदस्यता देता है जो शांति, सुरक्षा और खुशहाली के लिए गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
जमीन पर काम कौन देखेगा?
वहीं बोर्ड के एक सदस्य निकोलाय म्लादेनोव को गाजा का हाई रिप्रेजेंटेटिव बनाया गया है। वे बोर्ड और नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (एनसीएजी) के बीच कड़ी का काम करेंगे।एनसीएजी को ट्रंप की शांति योजना के दूसरे चरण का अहम हिस्सा बताया गया है। इसकी अगुवाई अली शाअथ करेंगे, जो गाजा में जरूरी सार्वजनिक सेवाओं की बहाली, नागरिक संस्थानों के पुनर्निर्माण, आम लोगों के जीवन को स्थिर करने और भविष्य में आत्मनिर्भर शासन की नींव रखने का काम करेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था भी शामिल
इतना ही नहीं गाजा में सुरक्षा बनाए रखने के लिए मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (आएसएफ) का कमांडर नियुक्त किया गया है। वे सुरक्षा संचालन, हथियारों से मुक्त माहौल मानवीय मदद और निर्माण सामग्री की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।

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