गाजियाबाद

फर्रुखनगर मंदिर परिसर में युवक की मौत पर घमासान

परिजनों और मंदिर समिति के आरोप-प्रत्यारोप आमने-सामने

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। दशहरा पर्व के दिन असालत नगर फर्रुखनगर स्थित अग्रवाल गुरुद्वारा शिव मंदिर परिसर में घायल हुए युवक सुधीर की उपचार के दौरान मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर जहां मृतक के परिजन मंदिर समिति पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं मंदिर समिति ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, निराधार और साजिश करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंदिर समिति से जुड़े संजय गोयल, नरेश कुमार और राजेंद्र (पुजारी) ने मृतक के परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि दशहरा के दिन मंदिर में किसी प्रकार का भंडारा आयोजित नहीं किया गया था, बल्कि केवल गुरु नानक देव जी के प्रसाद का वितरण होना था।
समिति के अनुसार, सुधीर नशे की हालत में मंदिर परिसर में आया था और असंतुलित होकर गिरने से उसका सिर मंदिर की पैड़ी से टकरा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मंदिर से जुड़े लोगों ने तत्काल उसकी मां और बहन को सूचना दी और घायल अवस्था में युवक को अस्पताल भिजवाया गया, जहां छह दिन बाद अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
मंदिर समिति का आरोप है कि घटना के बाद मृतक की मां सुखबीरी, भाई कृष्ण और बहनोई जोनी ने आपसी षड्यंत्र के तहत झूठी कहानी गढ़कर समिति के लोगों पर आरोप लगाए और आर्थिक धनराशि की मांग की जा रही है। समिति का दावा है कि रोजाना पैसों की मांग की जा रही है और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं।
प्रेस वार्ता में समिति ने यह भी कहा कि मृतक के परिजन जानबूझकर मंदिर समिति की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में समिति की ओर से पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद, थाना टीला मोड़ और चौकी फर्रुखनगर में प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
वहीं मृतक की जाति के पूर्व प्रधान संजय बाल्मीकि ने भी मंदिर समिति का समर्थन करते हुए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि घटना वाले दिन जिन दो लोगों के नाम शिकायत में शामिल किए गए हैं, वे मंदिर के आसपास मौजूद ही नहीं थे। पूर्व प्रधान का आरोप है कि पूरे मामले को गलत मंशा और आर्थिक लाभ के उद्देश्य से उछाला जा रहा है।
फिलहाल मृतक के परिजनों के आरोप और मंदिर समिति के जवाब के बीच प्रशासन के सामने निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की चुनौती बनी हुई हैं
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