ललितपुर

सावरकर चौक से तालाबपुरा तक अतिक्रमण का कहर, आमजन का चलना हुआ दुश्वार

फुटपाथ गायब, सड़क पर पैदल चलने को मजबूर लोग

दुकानों का फैलाव और बेतरतीब पार्किंग बनी बड़ी वजह
झगड़ों से तनाव तक, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों के घेरे में
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। सावरकर चौक स्थित अटा मंदिर से लेकर तालाबपुरा चौराहा तक का इलाका इन दिनों अतिक्रमण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यह मार्ग कभी शहर की प्रमुख और सुगम सड़कों में गिना जाता था, लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि यहां से गुजरना लोगों के लिए रोज़ की परेशानी बन चुका है। सड़क के दोनों ओर खड़ी गाडिय़ों ने फुटपाथ को पूरी तरह खत्म कर दिया है, वहीं दुकानदारों ने अपनी दुकानों से बाहर कई फीट तक अतिक्रमण कर रखा है। नतीजा यह है कि पैदल चलने वालों के लिए कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। मजबूरन लोग सड़क के बीच से निकलते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा हर समय बना रहता है। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे यह सामाजिक तनाव का कारण भी बनती जा रही है। भीड़ और तंग रास्तों के चलते आए दिन वाहन चालकों और राहगीरों के बीच कहासुनी हो जाती है, जो कई बार झगड़े में बदल जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर सुबह से शाम तक जाम की स्थिति बनी रहती है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के वाहनों को भी रास्ता मिलने में काफी समय लग जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। नगर पालिका और यातायात विभाग कभी-कभार औपचारिक अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, लेकिन अतिक्रमण कुछ ही दिनों में फिर पहले जैसा हो जाता है। जनता में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर कब तक इस समस्या को नजरअंदाज किया जाता रहेगा। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह इलाका किसी बड़ी दुर्घटना का केन्द्र बन सकता है।
पैदल यात्रियों की पीड़ा, हर कदम पर खतरा
इस मार्ग से गुजरने वाले पैदल यात्रियों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। फुटपाथ पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है, जिससे लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है। तेज रफ्तार वाहन, ऑटो और बाइक के बीच से निकलना किसी जोखिम से कम नहीं। महिलाएं और बुजुर्ग कई बार गिरते-पड़ते नजर आते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम के समय हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब बाजार की भीड़ बढ़ जाती है। बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावकों की चिंता दोगुनी हो जाती है। कई बार लोग वैकल्पिक रास्ते अपनाने को मजबूर होते हैं, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं। यह स्थिति साफ तौर पर बताती है कि अतिक्रमण ने आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी को किस कदर प्रभावित किया है।
व्यापार की आड़ में सड़क पर कब्जा
अटा मंदिर से तालाबपुरा तक दुकानों के बाहर रखा सामान, ठेले और अस्थायी निर्माण सड़क को लगातार संकरा कर रहे हैं। दुकानदारों ने अपनी दुकान की सीमा से बाहर निकलकर सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा जमा लिया है। इससे न केवल ट्रैफिक बाधित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। कई दुकानदार इसे अपनी मजबूरी बताते हैं, लेकिन सवाल यह है कि इसकी कीमत आमजन क्यों चुकाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी दुकानदार नियमों का पालन करें, तो सड़क पर काफी हद तक राहत मिल सकती है। मगर बिना सख्त कार्रवाई के हालात सुधरने की उम्मीद कम ही नजर आती है।
प्रशासनिक उदासीनता, कब मिलेगी राहत
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका को लेकर है। लोगों का कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा। कभी-कभार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। इससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है। लोग यह मानने लगे हैं कि बिना सख्त और नियमित कार्रवाई के इस समस्या से निजात नहीं मिलेगी। यदि जिम्मेदार विभाग समय रहते ठोस कदम उठाएं और नियमों का कड़ाई से पालन कराएं, तो यह मार्ग फिर से सुगम बन सकता है। फिलहाल, आमजन प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है।
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