नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। कल्याण सिंह सभागार में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सीएमओ ने बताया कि समाज में लड़कियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालने के लिये हर साल 24 जनवरी के दिन राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। बेटियों की सुरक्षा केवल उन्हें शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जन्म के अधिकार की रक्षा करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम लागू किया गया है। पी.सी. पी.एन.डी.टी. का पूरा नाम प्री कन्सेप्सन एण्ड पी नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक एक्ट है, जिसे हिंदी में गर्भधारण-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक अधिनियम कहा जाता है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य जन्म से पूर्व लिंग चयन और लिंग परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करना है। नोडल अधिकारी पी.सी. पी.एन.डी.टी. एवं उप सीएमओ डा.अवधेशचन्द्र यादव ने बताया कि पी.सी. पी.एन.डी.टी. एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस द्वारा डेकॉय (मुखबिर योजना) ऑपरेशन संचालित किए जाते है। सफल डेकॉय ऑपरेशन करवाने पर मुखबिर को 60 हजार रुपये मिथ्या ग्राहक को 1 लाख रुपये तथा मिथ्या ग्राहक सहायक को 40 हजार रुपये की धनराशि पुरस्कार के रूप में 03 किश्तों में दावा करने पर अनुमन्य की जाती है। इन ऑपरेशनों के तहत संदिग्ध क्लीनिकों पर कार्रवाई कर अल्ट्रासाउंड मशीनें सील की जाती हैं तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है। उन्होंने जनमानस से अपील की कि यदि कहीं भी लिंग जांच या पी.सी. पी.एन.डी.टी. अधिनियम के उल्लंघन की सूचना मिले, तो तुरंत संबंधित विभाग को अवगत कराएं। कन्या भू्रण हत्या मानवता के विरुद्ध अपराध है और इसके उन्मूलन में समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट ने राष्ट्रीय बालिका दिवस एवं गर्भधारण-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम प्रत्येक बेटी को सशक्त बनाना, एक मजबूत भारत का निर्माण करना है। उक्त अधिनियम के अंतर्गत गर्भधारण से पहले अथवा गर्भावस्था के दौरान बच्चे का लिंग जानना या बताना गंभीर अपराध है। यदि कोई डॉक्टर, अल्ट्रासाउंड सेंटर या व्यक्ति इस अपराध में संलिप्त पाया जाता है, तो कारावास, जुर्माना तथा क्लीनिक का पंजीकरण रद्द या निलंबित किया जा सकता है। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामस्वरूप कई राज्यों में लिंग अनुपात में सुधार देखा गया है



