गाजियाबाद
थाने की नाक के नीचे ‘काला बाजार’
लोनी बॉर्डर पुलिस को दिखता नहीं सट्टा — शायद नजरें कहीं और व्यस्त हैं!
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की तस्वीर इतनी साफ़ है कि देखने के लिए शायद आंखें बंद करनी पड़ती हैं। थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर सट्टे और जुए का अवैध कारोबार पूरे शबाब पर है, लेकिन हैरत की बात यह है कि यह सब कुछ पुलिस की नज़रों से कोसों दूर बताया जा रहा है — या यूं कहें कि पुलिस ने जानबूझकर नज़रें फेर रखी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सट्टा, जुआ, ताश के पत्ते, मोबाइल सट्टा और यहां तक कि मुर्गा लड़ाई तक खुलेआम खेली जाती है। दिनदहाड़े चल रहे इस ‘मनोरंजन केंद्र’ में न कोई डर है, न कोई खौफ — क्योंकि जब थाना पास हो तो डर किस बात का?
शिकायतों की फेहरिस्त लंबी है, लेकिन पुलिस की कार्यवाही उतनी ही छोटी। हर बार फरियादी को वही घिसा-पिटा जवाब मिलता है —
“देख लेंगे…”
अब सवाल यह है कि देखने के लिए कोई शुभ मुहूर्त या विशेष अवसर का इंतज़ार किया जा रहा है क्या?
लोगों का आरोप है कि छोटे-मोटे मामलों में बिजली की रफ्तार से कार्रवाई करने वाली पुलिस को थाने के इतने पास चल रहे सट्टे की भनक न लगे, यह बात किसी को हजम नहीं हो रही। चर्चा है कि अवैध वसूली की बारिश में कुछ लोग इतने भीग चुके हैं कि उन्हें काला-सफेद सब एक जैसा दिखने लगा है।
स्थानीय नागरिकों में रोष है, अविश्वास है और सवाल भी हैं। उनका कहना है कि लोनी बॉर्डर क्षेत्र में कानून अब किताबों तक सीमित रह गया है, ज़मीनी हकीकत में राज सट्टा संचालकों का है। योगी सरकार के सुशासन के दावे यहां सट्टे की पर्चियों और जुए की बाज़ियों के नीचे दबे नज़र आते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह कि चर्चाओं के अनुसार उच्चाधिकारी भी इस पूरे खेल से अनजान नहीं हैं, लेकिन शायद अवैध आमदनी का खेल इतना दिलचस्प है कि उस पर हाथ डालना जोखिम भरा लगता है।
अब बड़ा सवाल यही है —
क्या लोनी बॉर्डर पुलिस कभी इस सट्टे के काले कारोबार पर कार्रवाई करेगी? तय
या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा और “देख लेंगे” ही कानून-व्यवस्था का अंतिम जवाब बना रहेगा?
जनता जवाब चाहती है… और पुलिस शायद अभी भी देख रही हैं


