बागपत

बलात्कार के आरोपी को थाने से छोड़े जाने का आरोप

सिंघावली अहीर पुलिस पर पांच लाख रुपये लेकर रिहाई का गंभीर आरोप

पीड़िता व परिजन दहशत में, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
कानून के रखवाले ही बने न्याय में सबसे बड़ी बाधा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। जनपद बागपत के थाना सिंघावली अहीर की पुलिस एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला बलात्कार जैसे जघन्य अपराध से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता के परिवार ने थाना पुलिस पर आरोपी को अवैध रूप से धन लेकर छोड़ने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। यह मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम जनता के न्याय तंत्र पर भरोसे को भी झकझोर देता है।
पीड़िता के पिता द्वारा पुलिस क्षेत्राधिकारी बागपत को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, उनकी करीब 20 वर्षीय पुत्री दिनांक 17 नवंबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में घर से लापता हो गई थी। परिजनों द्वारा थाना सिंघावली अहीर में गुमशुदगी दर्ज कराई गई, लेकिन काफी समय तक युवती का कोई सुराग नहीं लग सका।
लगभग दो माह बाद 14 जनवरी 2026 को पुलिस ने युवती को पानीपत (हरियाणा) से बरामद किया। बरामदगी के बाद पीड़िता ने पुलिस पूछताछ में गंभीर आरोप लगाए। पीड़िता के अनुसार धनौरा सिल्वरनगर निवासी डॉक्टर इंतजार ने दवा देने के बहाने उसे नशीली दवा खिलाई, अगवा किया और लंबे समय तक उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
पीड़िता के आरोपों के आधार पर थाना सिंघावली अहीर में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने पीड़िता के धारा 161 एवं 164 सीआरपीसी के बयान दर्ज कराए तथा मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लिया गया।
हालांकि, पीड़ित परिवार का आरोप है कि 21 जनवरी 2026 को थाना पुलिस ने आरोपी से कथित रूप से पांच लाख रुपये लेकर उसे बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के चुपचाप रिहा कर दिया। परिवार का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है, जिससे पीड़िता और उसके परिजन गहरे भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, तो आरोपी को किस कानून और किस अधिकार के तहत छोड़ा गया। यह स्थिति पुलिस की निष्पक्षता और ईमानदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस क्षेत्राधिकारी बागपत से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा आरोपी को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, यह घटना कानून के रखवालों की भूमिका और पीड़ितों को मिलने वाले न्याय पर एक बड़ा सवाल बनकर सामने खड़ी है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button