दिल्लीराजनीतिराष्ट्रीय

ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कड़ा संदेश

आतंकवाद पर अब जवाब निर्णायक होगा

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार के दृढ़ रुख को रेखांकित किया, जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए आतंकवाद के खिलाफ मजबूत और निर्णायक प्रतिक्रिया का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन और मिशन सुदर्शन चक्र जैसी पहलें भारत की व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को बजट सत्र 2026-27 के पहले दिन संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया पर विशेष बल दिया और कहा कि भारत पर होने वाले सभी हमलों का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा। लोकसभा कक्ष में दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब शक्ति को विवेक और जिम्मेदारी के साथ निर्देशित किया जाता है, तो वह राष्ट्रीय हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सकती है।
श्री गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं का हवाला देते हुए मुर्मू ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया है ‘भय कहूं को देत नेह नेह भय मानत आन’। इसका अर्थ है कि हमें न तो किसी को डराना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए। इस निडर मन और भावना के साथ हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और बुद्धिमत्ता के साथ किया जा सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और परिचालन क्षमता देखी। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता देखी। अपने संसाधनों का उपयोग करते हुए, हमारे देश ने आतंकवाद के गढ़ों को नष्ट कर दिया। मेरी सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले सभी हमलों का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखना आतंकवाद से निपटने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो इस बात का संकेत है कि देश की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय शक्ति के सभी साधनों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मिशन सुदर्शन चक्र जैसी पहलों के माध्यम से सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने का काम जारी है। आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति मुर्मू ने माओवादी उग्रवाद के खिलाफ हासिल की गई महत्वपूर्ण सफलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहां एक समय माओवादी आतंक 126 जिलों को प्रभावित करता था, वहीं अब यह केवल आठ जिलों तक सीमित है, जिनमें से केवल तीन ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष माओवादी समूहों से जुड़े लगभग 2,000 लोगों ने आत्मसमर्पण किया, जिससे लाखों नागरिकों के जीवन में शांति और सामान्य स्थिति बहाल हुई। उन्होंने कहा, “वह दिन दूर नहीं जब हमारे देश से माओवादी आतंक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।”

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button