ललितपुर

प्रवासी पक्षियों का गेटवे बना बुन्देलखण्ड

हजारों मील का सफर तय करके आते हैं विदेशी पक्षी

ललितपुर के जलाशय बने महफूज आशियाना
रंग बिरंगी चिडिय़ों की भरमार, लेकिन पर्यटक हैं नदारद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। हर साल सर्दियों में जब साइबेरिया, मंगोलिया और उत्तरी यूरोप की धरती बर्फ से ढक जाती है, तब हजारों किलोमीटर दूर से रंग-बिरंगे परिंदों का एक काफिला भारत की ओर उड़ान भरता है। ये हैं हमारे प्रवासी पक्षी, जो भोजन, गर्मी और सुरक्षित प्रजनन स्थलों की तलाश में भारत आते हैं। बुंदेलखंड के ललितपुर जिले के बड़े जलाशय, अब इन मेहमानों की पहली पसंद बन चुके हैं। कभी सूखे और पथरीले भूभाग के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब डेढ़ दर्जन से अधिक बाँधों और जलाशयों के कारण पक्षियों का स्वर्ग बन गया है।
प्रवासी पक्षियों का लम्बा सफर
ये पक्षी 5 से 10 हजार किलोमीटर तक की दूरी तय करते हैं। इनका मार्ग साइबेरिया, अफगानिस्तान, मंगोलिया, चीन और पाकिस्तान से होकर भारत तक आता है। यह यात्रा मौसम परिवर्तन, भोजन की उपलब्धता और सुरक्षित प्रजनन की आवश्यकता के कारण होती है।
ललितपुर पक्षियों की पहली पसंद क्यों?
ललितपुर में बने बांधों ने स्थायी जल स्रोत प्रदान किए हैं। शांत वातावरण, कम शहरीकरण और प्रदूषण ना होने के कारण पक्षियों को सुरक्षित ठिकाना मिलता है।
प्राकृतिक सौंदर्य, पक्षियों की उपस्थिति में ये बाँध और सरोवर अत्यंत मनमोहक दिखते हैं मानो जल पर इंद्रधनुष उतर आया हो।
प्रमुख प्रवासी पक्षियों के हिंदी में नाम कुछ इस प्रकार हैं-धारीदार हंस, लंबी पूंछ वाला बतख, सुरखाब, साधारण चकवा, गडवाल बतख, चपटी चोंच वाला बतख, यूरोपीय जल कुक्कुट, धूसर बगुला, खुली चोंच वाला सारस आदि। इन पक्षियों की रंग-बिरंगी उपस्थिति से ललितपुर के जलाशय चित्रकला की जीवंत झील बन जाते हैं।
शिकार की चुनौती-
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इन पक्षियों का शिकार आम है। भारत में वाइल्ड लाइफ प्रोजेक्ट एक्ट जैसे कठोर कानून होने के बावजूद, कुछ स्थानों पर अवैध शिकार की घटनाएं होती हैं। यह न केवल पक्षियों की संख्या घटाता है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुँचाता है।
पर्यावरणीय संदेश
प्रवासी पक्षी हमें यह सिखाते हैं कि प्रकृति की सीमाएं नहीं होतीं। हमें इन पक्षियों की रक्षा करनी चाहिए। जलाशयों को प्रदूषण और शिकार से मुक्त रखना चाहिए। स्थानीय समुदायों को पक्षी संरक्षण में भागीदार बनाना चाहिए।
पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों से अपील
आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो ललितपुर के देवगढ़, राजघाट, माताटीला, शहजाद बांध बेतवा नदी क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में एक बार अवश्य आएं। यहां के बांधों पर सुबह-सुबह धुंध में नहाए हुए रंग-बिरंगे पक्षी आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। पक्षी दर्शन के साथ-साथ आप यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकते हैं।
प्रवासियों का स्वागत द्वार बना ललितपुर
ललितपुर अब केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि प्रवासी पक्षियों का स्वागत द्वार बन चुका है। यहां की जल संरचनाएं, शांत वातावरण और स्थानीय लोगों की जागरूकता ने इसे एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल में बदल दिया है। आइए, हम सब मिलकर इन परिंदों का स्वागत करें और प्रकृति के इस उपहार को सहेजें।
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