भरत पुर

भुसावर में वर्षों से चली आ रही परम्परा का किया निर्वाहन रोपित किए होली का डांडा

रंग- रंगीलों फागोत्सव माह का हुआ आगाज

अब भुसावर में बहेंगी फाल्गुन बयार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

भरतपुर : हिन्दू पंचांग का अन्तिम महीना फाल्गुन मास सोमवार से आरम्भ हो गया है। फाल्गुन मास में भुसावर कस्बे सहित उपखण्ड क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में ढंप-चाप की थाप पर होली की धमाल सुनाई देगी। जहां कस्बे के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मन्दिर परिसर, हूंकारेश्वर महादेव मन्दिर,भगत राज वाले हनुमानजी मन्दिर, पंचमुखी हनुमान जी मन्दिर, बनखण्डी वाले हनुमानजी मन्दिर, पुरानी अनाज मण्डी स्थित लक्ष्मण जी मन्दिर, राधा कृष्ण युगल किशोर जी मन्दिर, लक्ष्मी नारायण मन्दिर, चतुर्भुजी मन्दिर, अथाई वाले हनुमानजी मन्दिर परिसर आदि सहित विभिन्न मन्दिरों, देवालयों, उद्यानों और सामाजिक संस्थानों में श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए भगवान को नवीन पोशाक धारण कर रंग बिरंगे पुष्प,फूलों से सजाते हुए मनमोहक आकर्षक राधा कृष्ण,,भगवान शिव माता पार्वती के स्वरूप में सजीव झांकियो के साथ फूलों, अबीर-गुलाल से होली खेलकर लठमार होली खेलते हुए ब्रज की अनुठी परम्पराओं का निर्वहन करते हुए क्षेत्र के मनमोहक लोक गीतों से भगवान को रिझाते हुए चंग-ढाप, ढोलक, झांझ,मजीरा की थाप पर थिरकते हुए अपनी हाजिरी लगाईं जाएगी। वहीं दूसरी ओर होली महोत्सव की शुरुआत डांडा रोपड़ के साथ कस्बे सहित उपखण्ड क्षेत्र में जगह-जगह हुईं। वहीं दूसरी ओर कृष्णा पुजारी, राघवेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में वृक्ष की रोली,चन्दन, चावल से विधी विधान पूर्वक पंच पटेलों की श्रद्धा अनुसार पूजा अर्चना करते हुए होली के प्रतीकात्मक रूप में रौपा गया जहां होलिका दहन किया जाएगा। वहीं माघ मास की पूर्णिमा पर होली का डांडा रोपड़ किया गया जो आगामी होली पर्व के उत्साह का संकेत है। माघ मास की विदाई और फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही अब क्षेत्र में फागोत्सव की धूम रहेगी।वहीं कृष्णा पुजारी, राघवेन्द्र शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्यौहार मनाना शुभ होता है। जहां श्रद्धालुओं, सनातन धर्मप्रेमियों को वर्षों से चली आ रही परम्परा को जीवित रखते हुए नई पीढ़ी को अपनी अनूठी परम्परा को कायम रखना चाहिए। वहीं उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास में धार्मिक अनुष्ठान, व्रत- उपवास, आराधना एवं पुण्य कर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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