
एनसीएल-एनटीपीसी के भरोसे पानी छिड़काव, निगम के महंगे वाहन परिसर में खडे
बजट का रोना रोता निगम, CSR-DMF फंड होने के बावजूद जनता के पैसों की बर्बादी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। नगर निगम सिंगरौली की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर निगम द्वारा करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से खरीदे गए दो फबारा वाहन आज नगर निगम परिसर में बेकार खड़े जंग खा रहे हैं, जबकि शहर में पानी छिड़काव और धूल नियंत्रण का कार्य एनसीएल और एनटीपीसी के वाहनों के माध्यम से कराया जा रहा है।
शहरवासियों के लिए यह स्थिति हैरान करने वाली है, क्योंकि नगर निगम खुद संसाधनों की कमी और बजट अभाव का रोना रोता रहा है। इसके बावजूद करोड़ों रुपए खर्च कर खरीदे गए वाहन उपयोग में न लाए जाना, नगर निगम की मंशा और अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बताया जा रहा है कि जब से कलेक्टर गौरव बैनर ने सिंगरौली जिले का प्रभार संभाला है, तब से पानी छिड़काव और साफ-सफाई की व्यवस्था कुछ हद तक बेहतर हुई है, लेकिन यह सुधार भी नगर निगम के प्रयासों से नहीं, बल्कि एनसीएल-एनटीपीसी जैसी औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से संभव हो पाया है।
नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या महापौर रानी अग्रवाल और नगर निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेय को इन जंग खा रहे फबारा वाहनों की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधी गई है। जनता यह समझ नहीं पा रही कि नगर निगम के शीर्ष नेतृत्व की मंशा क्या है और अधिकारियों को किस आधार पर जवाबदेही से मुक्त रखा गया है।
CSR और DMF फंड के बावजूद बदहाली
सिंगरौली जैसे खनन और औद्योगिक जिले में CSR और DMF जैसे बड़े फंड उपलब्ध होने के बावजूद नगर निगम की यह स्थिति साफ दर्शाती है कि समस्या फंड की नहीं, बल्कि प्रबंधन और इच्छाशक्ति की कमी की है। मशीनें खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं और शहर की जरूरतें बाहरी एजेंसियों के भरोसे छोड़ी जा रही हैं।
जांच की उठी मांग
शहर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और फबारा वाहनों को तत्काल चालू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो यह मामला सरकारी धन की खुली बर्बादी का बड़ा उदाहरण बन जाएगा।
सवाल वही है
जब नगर निगम के पास खुद के संसाधन हैं,
तो करोड़ों के फबारा वाहन आखिर किस काम के लिए खरीदे गए?



