नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। आधुनिकता की दौड़ में घरों से दूर हो रही नन्हीं गौरैया की चहचहाहट को वापस लाने के लिए बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल 5.0 के मंच का उपयोग एक अनूठी पहल के लिए किया गया। फेस्टिवल के दौरान इंडियन बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसायटी और मानव ऑर्गेनाइजेशन के पर्यावरण प्रेमियों ने गौरैया संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाकर साहित्यकारों और आगंतुकों का ध्यान खींचा।
आयोजकों का जताया आभार
पर्यावरणविदों और अभियान की टीम ने इस सफल मंच के लिए बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल के मुख्य आयोजक चंद्रप्रताप सिंह और अनमोल दुबे का विशेष धन्यवाद व्यक्त किया। टीम ने कहा कि चंद्रप्रताप सिंह और अनमोल दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर न केवल साहित्य का भव्य आयोजन किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषय को एक सशक्त मंच प्रदान कर समाज को नई दिशा देने का सराहनीय कार्य किया है।
गौरैया की पाती ने लोगों को किया जागरूक
ललितपुर के प्रमुख पर्यावरणविद् एडवोकेट पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने गौरैया की पाती (चि_ी) के माध्यम से एक भावुक अपील पेश की। पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने कहा, साहित्य और संस्कृति तभी सुरक्षित रहेंगे जब हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। गौरैया को वापस आंगन में लौटाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
आकर्षण का केन्द्र रहे कृत्रिम घरौंदे
डा. सोनिका कुशवाहा के नेतृत्व में लगाए गए स्टॉल पर पक्षियों के मुखौटे और कृत्रिम घोंसले बच्चों और बड़ों के बीच आकर्षण का केन्द्र रहे। पर्यावरण योद्धा धर्मेंद्र सिंह ने स्वयं निर्मित लकड़ी के घोंसलों का प्रदर्शन किया और लोगों को इन्हें अपने घरों में लगाने के लिए प्रेरित करते हुए नि:शुल्क वितरित भी किया। इस मुहिम में अधिवक्ता नीरज शिवहरे और लेखक अभिनव जैन,दिनेश कुशवाहा ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने संदेश दिया कि कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते शहरों में छोटे-छोटे कृत्रिम घोंसले गौरैया के अस्तित्व को बचाने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।



