गाजियाबाद

डासना जेल का ‘रेडियो परवाज़’

बंदी बन रहे हैं रेडियो जॉकी, रिहाई के बाद मिल रहा रोजगार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : गाजियाबाद की डासना जेल में बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन द्वारा जहां एक ओर विभिन्न व्यावसायिक हुनर सिखाए जा रहे हैं, वहीं कंप्यूटर प्रशिक्षण और रेडियो जॉकी जैसे विशेष कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इन पहलों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है—प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कई बंदी रिहाई के पश्चात रोजगार हासिल कर रहे हैं।
जेल प्रशासन के अनुसार, बीते वर्ष 20 से अधिक बंदियों ने रेडियो जॉकी (आरजे) का प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें से कई बंदी जमानत या रिहाई के बाद निजी रेडियो स्टेशनों में बतौर आरजे कार्य कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहा जाता, बल्कि रिहाई के बाद रोजगार उपलब्ध कराने में भी पूरा सहयोग दिया जाता है।
‘रेडियो परवाज़’ दे रहा नई उड़ान
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि हाल ही में दहेज हत्या के आरोप में एक बंदी जेल आया था। कई महीनों तक जेल में रहने के दौरान उसकी रुचि को देखते हुए उसे ‘डासना जेल रेडियो परवाज़’ प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा गया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उसने जेल के रेडियो स्टेशन पर सक्रिय रूप से काम किया और संचालन का अनुभव हासिल किया। जमानत पर रिहा होने के बाद अब वह एक प्रतिष्ठित रेडियो स्टेशन में आरजे के रूप में कार्यरत है।
जिला कारागार गाजियाबाद में स्वयंसेवी संस्था इंडिया विजन फाउंडेशन के सहयोग से ‘रेडियो परवाज़’ नामक स्टेशन संचालित किया जा रहा है। इसकी खास बात यह है कि इसका संचालन स्वयं बंदी करते हैं और अन्य बंदियों को भी प्रशिक्षण देते हैं।
भजन से लेकर मोटिवेशन तक विविध कार्यक्रम
रेडियो परवाज़ पर भजन कैप्सूल, प्रेरणादायक कहानियां, महान व्यक्तित्वों की जीवनी, पौराणिक प्रसंग, ‘संवेदना प्रसारण’, आपकी फरमाइश, सदाबहार गीत और संध्या भजन जैसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को स्क्रिप्ट लेखन, सही उच्चारण, आवाज़ में उतार-चढ़ाव, रिकॉर्डिंग तकनीक और कार्यक्रम प्रस्तुति की बारीकियां सिखाई जाती हैं।
जेल प्रशासन के अनुसार, समय-समय पर विभिन्न प्रतिष्ठित रेडियो स्टेशनों के अनुभवी आरजे भी जेल आकर बंदियों के साथ संवाद करते हैं। वे उन्हें इंडस्ट्री का अनुभव साझा करते हैं और विशेष कार्यक्रम तैयार करने की तकनीक सिखाते हैं।
आत्मविश्वास और पुनर्संस्कार की पहल
‘संवेदना प्रसारण’ कार्यक्रम विशेष रूप से लोकप्रिय है, जिसमें बंदी अपने अनुभव, भावनाएं और सामाजिक संदेश अन्य कैदियों के साथ साझा करते हैं। इससे उन्हें आत्म-अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है और मानसिक व भावनात्मक संतुलन में मदद मिलती है।
जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसी सकारात्मक गतिविधियां बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। ‘रेडियो परवाज़’ केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि पुनर्वास की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है।
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