बेतुल
बैतूल संवेदनशील कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क यथावत रखा जाए
बीज पेटेंट और विदेशी कॉरपोरेट नियंत्रण पर सख्त नियम लागू किए जाएं

अमेरिका से संभावित ट्रेड डील पर किसानों की बढ़ी चिंता, स्वतंत्र किसान पार्टी ने अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। अमेरिका के साथ प्रस्तावित संभावित व्यापार समझौते को लेकर जिले में किसानों की चिंता खुलकर सामने आई है। मंगलवार को स्वतंत्र किसान पार्टी ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार का ध्यान भारतीय किसानों, कृषि मजदूरों और डेयरी क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों की ओर आकर्षित किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अयाज खान ने कहा कि यह ट्रेड डील केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति का विषय नहीं है, देश की कृषि संरचना, खाद्य संप्रभुता, ग्रामीण आजीविका और दुग्ध उत्पादन तंत्र से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मुक्त व्यापार समझौते के दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
– सस्ते आयात से किसानों को नुकसान की आशंका
ज्ञापन में स्वतंत्र किसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खान ने कहा कि अमेरिका की कृषि प्रणाली भारी सब्सिडी पर आधारित है। ऐसे में गेहूं, मक्का और सोयाबीन जैसे उत्पादों का सस्ते दामों पर आयात बढ़ा तो भारतीय किसानों को अपनी उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। इससे खेती घाटे का व्यवसाय बन सकती है।
– एमएसपी और सरकारी खरीद व्यवस्था पर खतरा
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खान ने कहा कि प्रस्तावित समझौता न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और सरकारी खरीद प्रणाली को कमजोर कर सकता है। इससे कृषि क्षेत्र निजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में जाने का खतरा बढ़ेगा, जो सामाजिक-आर्थिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। साथ ही दूध पाउडर, चीज और अन्य डेयरी उत्पादों के आयात से देश की सहकारी दुग्ध संरचना प्रभावित होगी। इससे लघु पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं की आय पर सीधा असर पड़ेगा तथा दुग्ध आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। पेटेंट युक्त बीजों की अनिवार्यता से किसान पारंपरिक बीज स्वायत्तता खो सकते हैं और कृषि क्षेत्र में विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों का दबदबा बढ़ सकता है। वहीं आयात आधारित कृषि मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम की आवश्यकता घटने से बेरोजगारी और पलायन की स्थिति भी बन सकती है। इसके अलावा आयात निर्भरता बढ़ने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की प्रभावशीलता कमजोर पड़ सकती है, जो देश की खाद्य संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती होगी।
– स्वतंत्र किसान पार्टी की यह है प्रमुख मांगें
स्वतंत्र किसान पार्टी ने मांग की है कि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को किसी भी मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए, एमएसपी को कानूनी गारंटी दी जाए, संवेदनशील कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क यथावत रखा जाए तथा बीज पेटेंट और विदेशी कॉरपोरेट नियंत्रण पर सख्त नियम लागू किए जाएं।



