शामली

चांद दिखाई देते ही रमज़ान का आगाज़

मस्जिदों में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कांधला/शामली। माहे रमज़ान का चांद नजर आते ही इलाके भर में इबादत का जज़्बा चरम पर पहुंच गया। चांद की तस्दीक होते ही मस्जिदों के दरवाजे देर रात तक खुले रहे और नमाज़-ए-तरावीह के लिए अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई नमाज़ की तैयारी में जुटा नजर आया।
रमज़ान कोई रस्म भर नहीं, बल्कि रूह की पाकीजगी और किरदार की मजबूती का महीना है। इसी मुबारक महीने में अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-पाक नाज़िल कर इंसानियत को हिदायत की रौशनी अता की। रोज़ा महज भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि अपने नफ़्स पर काबू पाकर तक़वा की राह पर चलने का पैगाम है।
उलेमा-ए-कराम का कहना है कि रमज़ान रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना है, जिसमें हर नेक अमल का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। यह वह महीना है जिसमें बंदा अपने रब के सबसे करीब होता है।
अल्लाह की तारीफ करते हुए नमाज़ियों ने कहा कि वह बड़ा ग़फूर-उर-रहीम है, जो अपने बंदों को तौबा और इस्लाह का सुनहरा मौका देता है। रमज़ान इंसान को झुकना सिखाता है, टूटना नहीं; सब्र सिखाता है, शिकायत नहीं; मोहब्बत सिखाता है, नफरत नहीं।
इसी के साथ क्षेत्र में अमन-चैन और भाईचारे की दुआएं भी की गईं। समाज के जिम्मेदार लोगों ने अपील की कि इस मुकद्दस महीने में दिखावे से दूर रहकर इबादत, खिदमत और इंसानियत को तरजीह दी जाए।
रमज़ान का पैगाम साफ है — खुद को बदलिए, समाज खुद बदल जाएगा।
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