
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : क्षेत्र के सुप्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ Dr. Abhinav Tomar लगातार नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर समाज को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे केवल क्लीनिक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो, जन-जागरूकता संदेश और समाचार पत्रों के माध्यम से भी अभिभावकों तक जरूरी जानकारी पहुंचाते हैं।
इसी क्रम में उन्होंने रंगों के त्योहार (होली) को लेकर National Press Times के माध्यम से विशेष अपील जारी की है, जिसमें उन्होंने बताया कि यह त्योहार जहां बड़ों के लिए आनंद और उत्साह का प्रतीक है, वहीं नवजात और छोटे बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
क्यों खतरनाक हो सकते हैं रंग छोटे बच्चों के लिए?
डॉ. अभिनव तोमर ने बताया कि बाजार में बिकने वाले अधिकांश रंगों में केमिकल, सिंथेटिक डाई, भारी धातुएं और कृत्रिम सुगंध मिलाई जाती है।
त्वचा पर प्रभाव – नवजात और छोटे बच्चों की त्वचा बेहद कोमल होती है। रासायनिक रंगों से एलर्जी, रैशेज, जलन और इंफेक्शन हो सकता है।
आंखों को नुकसान – रंग का कण आंख में जाने से कंजक्टिवाइटिस, जलन, सूजन या कॉर्निया को नुकसान हो सकता है।
सांस की समस्या – रंगों की धूल सांस के जरिए फेफड़ों में जाने पर एलर्जी, अस्थमा अटैक या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
मुंह में जाने का खतरा – छोटे बच्चे अक्सर हाथ मुंह में डालते हैं, जिससे केमिकल शरीर के अंदर पहुंच सकता है।
नवजात शिशुओं के लिए विशेष सावधानी
डॉ. तोमर ने स्पष्ट कहा कि एक वर्ष से कम आयु के बच्चों को रंगों से पूरी तरह दूर रखना चाहिए।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी:
नवजात को भीड़-भाड़ और रंग खेलने वाली जगहों से दूर रखें।
घर के अंदर ही सुरक्षित वातावरण में रखें।
यदि कोई रंग गलती से लग जाए तो तुरंत गुनगुने पानी से साफ करें।
आंख या त्वचा में जलन होने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
शॉर्ट वीडियो के माध्यम से जन-जागरूकता
डॉ. अभिनव तोमर का मानना है कि आज के डिजिटल दौर में लोगों तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम सोशल मीडिया है। वे समय-समय पर छोटे-छोटे वीडियो बनाकर माता-पिता को जागरूक करते हैं — जैसे नवजात की देखभाल, टीकाकरण, मौसमी बीमारियों से बचाव और त्योहारों में बरती जाने वाली सावधानियां।
उनकी यह पहल क्षेत्र में काफी सराही जा रही है, क्योंकि कई परिवार इन वीडियो के माध्यम से समय रहते सतर्क हो जाते हैं।
त्योहार मनाएं, लेकिन समझदारी से
डॉ. तोमर ने संदेश दिया कि त्योहार खुशियों का प्रतीक हैं, लेकिन बच्चों की सेहत से बढ़कर कुछ नहीं।
उन्होंने सुझाव दिया:
केवल ऑर्गेनिक या प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।
बच्चों को पूरा ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
खेल के बाद तुरंत स्नान कराएं।
बच्चों को धूप और धूल से बचाएं।
समाज के लिए संदेश
“हमारी छोटी सी लापरवाही बच्चों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। त्योहार जरूर मनाएं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि रखें।” — डॉ. अभिनव तोमर
आज जब बाजार में चमकीले और आकर्षक रंगों की भरमार है, ऐसे समय में एक जागरूक बाल रोग विशेषज्ञ का यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. अभिनव तोमर का यह प्रयास न केवल चिकित्सा सेवा है, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का प्रमाण भी है।
त्योहार की असली खुशी तभी है, जब हमारे बच्चे सुरक्षित, स्वस्थ और मुस्कुराते रहें।



