गाजियाबाद
कागज़ों में शहर रोज़ चमकता है जनाब…
जमीन पर सड़ांध का साम्राज्य , लोनी नगर पालिका सफाई व्यवस्था पुनः सवालों के घेरे में

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी नगर पालिका परिषद ने सफ़ाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए लायन ग्रुप को लगभग चार करोड़ रुपये प्रतिमाह का ठेका दे रखा है। रकम सुनकर लगता है मानो गली-गली में इत्र का छिड़काव होता होगा और नालियाँ शीशे-सी चमकती होंगी। मगर हक़ीक़त यह है कि वार्ड 52 की मदरसे वाली मोहसिन की यह गली आज भी गंदगी और जलभराव की स्थायी प्रदर्शनी बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स से कम नहीं। जगह-जगह भरा पानी, उठती बदबू और कीचड़ से सना रास्ता , मानो सफ़ाई व्यवस्था ने यहीं आकर आत्मसमर्पण कर दिया हो।
शिकायतों का रिकॉर्ड भी कम दिलचस्प नहीं। कॉलोनी वासियों और सभासद द्वारा कई बार सफ़ाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर नियमित सफ़ाई कराने की मांग की गई। लेकिन पालिका अधिकारी और कार्यदायी फर्म शायद उसी चमकते कागज़ी शहर में व्यस्त हैं, जहाँ सब कुछ दुरुस्त दिखता है। ज़मीन की गंदगी शायद उनकी नज़र के दायरे में आती ही नहीं।
इस बदहाल स्थिति से उठती दुर्गंध ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है। संक्रामक रोग फैलने का खतरा अलग मंडरा रहा है। मगर सवाल वही चार करोड़ महीना खर्च होने के बावजूद सफ़ाई नदारद है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
और सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न —
जब सफ़ाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं पाई गई, तो संबंधित फर्म के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई?
या फिर कार्रवाई भी कागज़ों में ही चमक रही है?
फिलहाल वार्ड 52 के बाशिंदे यही कह रहे हैं —
“हमें काग़ज़ों का नहीं, ज़मीन का शहर चाहिए साहब… जहाँ सफ़ाई फोटो में नहीं, गली में दिखे।”


