
मुफ्ती नौशाद जमाली ने बताया रमजान का रूहानी फलसफा
हाफिजों और शहर पेश इमाम का हुआ इस्तकबाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। अकीदत, एहतराम और रूहानी सुकून का संगम कुछ ऐसा ही मंजर था ऐतिहासिक हजरत बाबा सदनशाह ग्राउंड का, जहां उर्स कमेटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय तरावीह का सिलसिला पूरे अदब के साथ मुकम्मल हुआ। जैसे ही हाफिज-ओ-कारी तौफीक रजा ने कुरान-ए-पाक मुकम्मल मुकम्मल किया, पूरा पंडाल आमीन की सदाओं से गूंज उठा और हर आंख खुदा की बारगाह में नम नजर आई। आलिम-ए-दीन मुफ्ती नौशाद जमाली ने इस मौके पर अपने मखसूस (विशेष) अंदाज में रमजान-उल-मुबारक की फजीलत बयान की। उन्होंने कहा कि रमजान केवल भूख और प्यास का इम्तिहान नहीं, बल्कि यह रूह की पाकीजगी और नफ्स पर फतह हासिल करने का महीना है। सात दिन की तरावीह हमें खुदा के कलाम (कुरान) से रूबरू कराती है और इंसानियत की राह पर चलने का पैगाम देती है। मुफ्ती ने कहा कि ये हाफिज हमारी कौम के वो चिराग हैं जो कुरान की रोशनी को दिलों तक पहुंचा रहे हैं। यह महीना हमें गरीबों का दर्द समझने और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। लोगों को चाहिए कि गरीबों, यतीमों और पड़ौसियों का ख्याल रखें। अंत में मुफ्ती नौशाद जमाली ने हाथ उठाकर मुल्क की तरक्की, आपसी भाईचारे और शहर की खुशहाली के लिए पुरअसर दुआ मांगी।
उलेमा और हाफिजों का कमेटी ने किया इस्तकबाल
इस रूहानी जलसे का सबसे भावुक और गौरवशाली क्षण वह था जब शहर पेश इमाम व शहर के हाफिजों और सात दिनों तक अपनी सुरीली आवाज में कुरान सुनाने वाले हाफिज व उलेमाओं और हाफिजों को कमेटी के पदाधिकारियों ने साफा बांधकर, फूल-मालाओं से लादकर और दुआओं के साथ सम्मानित किया।
सलाम पेश कर मांगी अमन की दुआ
तरावीह के समापन पर फिजां सलातो व सलाम के तरानों से महक उठी। उलेमाओं व अवाम ने बारगाह-ए-रिसालत में सलाम पेश किए, बड़े ही अदब के साथ ‘सलाम’ पढ़ा गया। इसके बाद अमन चैन के लिए खुदा से दुआ मांगी। हाफिज कारी ने सात रातों में मुकम्मल कुरान की तिलावत की। शहर और आसपास के इलाकों से हजारों की तादाद में नमाजी पहुंचे। उर्स कमेटी द्वारा नमाजियों के लिए वजू, रोशनी और सुरक्षा के बेहतर प्रबंध किए गए।



