बेतुल
बैतूल कानून के दायरे के बाहर आदेश करती राजस्व अदालत: अधिवक्ता भारत सेन
संभाग आयुक्त के आदेश पर विधि, न्याय एवं मानवाधिकारो के सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। राजस्व न्यायालय नर्मदापुरम संभाग आयुक्त होशंगाबाद का एक आदेश कानून एवं न्याय के जानकारो के बीच बहस का विषय बन गया हैं। मामला खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की धारा 21 एवं मप्र खनिज नियम 2022 का हैं। राज्य सरकार की ओर से खनिज विभाग बैतूल की अपील पर राजस्व न्यायालय संभाग आयुक्त के आदेश पर विधि, न्याय एवं मानवाधिकारों के सवाल उठने लगे हैं। जिला न्यायालय बैतूल में खनिज कानून के प्रमुख विशेषज्ञ और वर्षों से खनिज अपील मामलों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन ने आज नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त द्वारा 02 मार्च 2026 को पारित आदेश (प्र.क्र. 0158/अपील/2025-26) को पूरी तरह अवैध करार दिया है।
*क्या हैं खनिज का मामला*
राजस्व न्यायालय अपर कलेक्टर बैतूल का राजस्व प्रकरण 0065/अ – 67 / 3024-25 में पारित आदेश में खनिज विभाग बैतूल का खान एवं अधिनियम 1957 एवं मप्र खनिज नियम 2022 के अंतर्गत 390 घनमीटर खनिज मुरम के अवैध उत्खन्न एवं परिवहन पर प्रस्तुत प्रतिवेदन को निरस्त कर दिया था। कारण खनिज विभाग, खनिज अपराध को प्रमाणित नहीं कर सका था। खनिज विभाग ने संभाग आयुक्त की अदालत में अपर कलेक्टर बैतूल के आदेश के विरूद्ध अपील की थी।
अधिवक्ता भारत सेन ने कहा मैं बैतूल जिला न्यायालय में पिछले 15 वर्षों से खनिज विभाग के मामलों की पैरवी कर रहा हूं। यह आदेश मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण) नियम-2022 के मूल प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। मैं इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने योग्य मानता हूँ। इसमें कम से कम छह गंभीर वैधानिक दोष हैं जो इसे जड़ से खारिज करने के लिए पर्याप्त हैं।
*ये है प्रमुख वैधानिक दोष*
नियम-27(2) के तहत अनधिकृत रीमांड और नई जांच का आदेश
अपील प्राधिकारी को केवल पुष्टि, संशोधन या निरस्तीकरण का अधिकार है। आयुक्त ने अपर कलेक्टर को ‘बिना किसी सक्षम अनुमति के’ नई जांच कराने का निर्देश दे दिया। नियम-23 के तहत 14 अगस्त 2024 को जो पंचनामा और निरीक्षण हो चुका था, उसे नकारने का यह प्रयास नियम-2022 के खिलाफ है। अपील चरण में दे नोवो जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
*सभी दलीलों पर विवेक का प्रयोग नहीं*
उत्तरवादी पक्ष ने भूमि के अवैध अंतरण (भू-राजस्व संहिता धारा 165(6)), वीडियोग्राफी न होने (नियम-23(2)), पंचनामा पर साक्षियों के इंकार, कोई मशीन-वाहन न जप्त होने और शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर से मुकरने जैसे अहम आधार रखे थे। खान एवं खनिज अधिनियम 1957 एवं मप्र खनिज नियम 2022 के आज्ञापक प्रावधानों का खनिज निरीक्षक जांच अधिकारी द्वारा खनिज अपराध की जांच में पालन नहीं किया गया था आयुक्त ने इनमें से एक पर भी कोई टिप्पणी नहीं की। यह रीज़न्ड ऑर्डर के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।
3.बिना अनुमति’ की गलत पूर्वधारणा
भूमि निजी है (खसरा क्र. 105/5)। गौण खनिज मुरूम पर निजी भूमि में उत्खनन के लिए अलग पट्टे की जरूरत नहीं होती। आयुक्त ने खुद ‘बिना अनुमति’ मान लिया जबकि असली सवाल यह था कि क्या उत्तरवादीगण ने उत्खनन किया ही था। यह एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा-4 का गलत अनुप्रयोग है।
*आंशिक स्वीकार’ शब्दावली का गलत प्रयोग*
आदेश में लिखा आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है फिर पूरी तरह निरस्त करके रीमांड कर दिया। यह भाषा और कानून दोनों की दृष्टि से असंगत है। आंशिक स्वीकार का मतलब कुछ हिस्सा बरकरार रखना होता है, पूर्ण निरस्तीकरण नहीं।
*साक्ष्य का मानक अस्पष्ट*
अपर कलेक्टर ने संदेह से परे का सही मानक अपनाया था। आयुक्त ने उसे विधिक भूल कहकर खारिज कर दिया लेकिन खुद कोई नया मानक नहीं बताया। क्वाज़ी क्रिमिनल पेनल्टी मामले में यह जिम्मेदारी से भागना है।
*अपील की ग्राह्यता पर अपर्याप्त चर्चा*
60 दिन की समय-सीमा और 1000 रुपये फीस का मुद्दा उठाया गया था। आयुक्त ने सिर्फ ‘विधि अनुसार समयावधि में’ लिख दिया। विलंब माफी पर कोई कारण नहीं बताया गया।
अधिवक्ता भारत सेन ने अंत में कहा यह आदेश शासन को राजस्व बचाने के नाम पर निर्दोष नागरिकों को अनंत मुकदमेबाजी में फंसाने वाला है। खनिज नियम-2022 का मकसद अवैध खनन रोकना है, न कि निर्दोष लोगों को परेशान करना। मैं प्रभावित पक्षकारों को सलाह देता हूं कि वे तुरंत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करें।
यह बयान बैतूल जिले के सोनाघाटी (खसरा क्र. 105/5) के 390 घनमीटर मुरूम उत्खनन मामले को लेकर दिया गया है, जिसमें अपर कलेक्टर ने शास्ति प्रस्ताव खारिज कर दिया था।



