
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। पवित्र रमजान के महीने में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना ही सच्ची इबादत है। सदन शाह मस्जिद के इमाम मुफ्ती नौशाद जमाली ने जुमे की नमाज के दौरान नमाजियों को संबोधित करते हुए यह महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम में रमजान के महीने में गरीबों का खास ख्याल रखने की ताकीद की गई है।
पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद है असल इबादत
मुफ्ती नौशाद जमाली ने बताया कि हर मुसलमान का यह फर्ज है कि वह अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और गरीब दोस्तों का ख्याल रखे। अपने माल से जकात, फितरा और सदका निकालकर उनकी मदद करें, ताकि समाज का हर तबका रमजान और ईद की खुशियां सम्मान के साथ मना सके।
फितरा (सदका-ए-फितर), एक अनिवार्य दायित्व
उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि फितरा रमजान के अंत में ईदुल फितर की नमाज से पहले दिया जाने वाला दान है। इसका मुख्य उद्देश्य रोजे के दौरान हुई अनजाने में कमियों को शुद्ध करना और जरूरतमंदों को ईद की खुशियों में शामिल करना है। यह दान हर उस सक्षम मुसलमान (पुरुष, महिला और बच्चे) पर वाजिब (जरूरी) है, जिसके पास अपनी बुनियादी जरूरतों से ज्यादा संपत्ति या खाना मौजूद हो।
फितरे की रकम तय
मुफ्ती नौशाद जमाली ने बताया कि पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के समय के अनुसार यह 1 साअ (लगभग 2 किलो 45 ग्राम) गेहूं या अनाज के बराबर होता है।
इस साल जिले में फितरे की रकम 65 प्रति व्यक्ति निर्धारित की गई है।
समय पर अदा करें फितरा
उन्होंने अपील की है कि फितरे की रकम ईद की नमाज से पहले ही अदा कर देनी चाहिए। इससे गरीब, यतीम और बेसहारा लोग समय रहते अपनी जरूरतें पूरी कर सकेंगे और ईद की खुशियों में शरीक हो पाएंगे। ऐसा करने से ही खुदा की बारगाह में ज्यादा अज्र और सवाब मिलता है।



