
नोटिफिकेशन वापस लेने की मांग, कहा – समाज में वैमनस्य बढ़ाने वाला है आदेश
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : बागपत जनपद के बड़ौत में सर्व समाज के लोगों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी नोटिफिकेशन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में एकत्र होकर कोताना रोड से जुलूस के रूप में बड़ौत तहसील पहुंचे और वहां धरना देकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने इस नोटिफिकेशन को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी द्वारा जारी यह नोटिफिकेशन समाज को दो भागों में बांटने का कार्य करेगा। उनका कहना था कि इससे समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा तथा वर्गों के बीच वैमनस्य की भावना बढ़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस नोटिफिकेशन को वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
वक्ताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में एससी-एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को कुछ विशेष कानूनी सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसको लेकर देशभर में सामान्य वर्ग के लोग विरोध जता रहे हैं। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है और इस विषय पर 19 मार्च को सुनवाई प्रस्तावित है।
धरने के दौरान एडवोकेट दीपक शर्मा ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि किसी भी नीति या अधिसूचना को लागू करने से पहले समाज के सभी वर्गों की भावनाओं और अधिकारों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यूजीसी का यह नोटिफिकेशन कई प्रकार की शंकाओं और असंतोष को जन्म दे रहा है, इसलिए सरकार को इस विषय पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और संतुलन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी आदेश या कानून से समाज के किसी भी वर्ग में असंतोष उत्पन्न होता है तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह उस पर गंभीरता से विचार करे और आवश्यक संशोधन करे, ताकि सभी वर्गों को समान सम्मान और अधिकार मिल सकें।
सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि नोटिफिकेशन में कई ऐसे शब्द और प्रावधान शामिल किए गए हैं जो सामान्य वर्ग के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। उन्होंने मांग की कि अधिसूचना में प्रयुक्त “हितधारक” और “अंतर्निहित” जैसे शब्दों को हटाया जाए तथा हितधारकों की श्रेणी में सामान्य वर्ग को भी शामिल किया जाए, ताकि सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी कानून या नीति में स्पष्टता का अभाव रहता है तो उसका दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के प्रावधानों के माध्यम से सामान्य वर्ग के लोगों का शोषण हो सकता है। इसलिए सरकार को इस नोटिफिकेशन की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन करने चाहिए।
धरने के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि यह नोटिफिकेशन समाज में भेदभाव को बढ़ावा देने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने मांग की कि सामान्य वर्ग की सुरक्षा और अधिकारों को भी समान रूप से सुनिश्चित किया जाए। यदि सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो सर्व समाज के लोग व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इस मौके पर दिनेश शर्मा, सेवाराम शर्मा, कृष्ण पाल, यादराम शर्मा, कालिचरण शर्मा, रामपाल त्यागी, सुरेंद्र सिंह मेघा, मनोज जैन, लक्की जैन, हिमांशु गुप्ता, हंसराज गोयल, सचिन गुप्ता, मनोज कुमार शर्मा, पंकज जैन, सक्षम सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
धरने की अध्यक्षता 84 देशखाप के आदित्य भारद्वाज चौधरी ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन राधेश्याम शर्मा ने किया। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि जब तक यूजीसी नोटिफिकेशन को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।



