दिल्ली

अंतरिक्ष से आएगी ईरान पर आफत 

युद्ध समाप्त करने के लिए इजरायल फिर से करेगा ब्लू स्पेरो का इस्तेमाल?

नई दिल्ली : सबसे पहले आपको बता दें कि ब्लू स्पेरो को इजराइल की मशहूर रक्षा कंपनी राफेल एडवांस सिस्टम्स ने विकसित किया है। यह वही कंपनी है जिसने दुनिया भर के कई अत्याधुनिक हथियार और मिसाइल सिस्टम बनाए हैं। ब्लू स्पेरो को खासतौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सके और अपने लक्ष्य तक बिना रोके पहुंच सके।
दुनिया में आजकल युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं बल्कि आसमान और अंतरिक्ष के करीब भी लड़े जा रहे हैं। आधुनिक हथियारों की दौड़ में कई देश ऐसी मिसाइलें बना चुके हैं जिन्हें रोकना लगभग नामुमकिन माना जाता है। इसी तरह की एक मिसाइल इजराइल की ब्लू स्पैरो है। यह मिसाइल इस समय दुनिया के कई रक्षा एक्सपर्टों के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द बन चुकी है क्योंकि कहा जाता है कि इसके सामने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी कई बार बेबस हो जाते हैं। आखिर ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में कि यह दुश्मन के सबसे मजबूत रक्षा कवच को भी चकमा दे देती है।
सबसे पहले आपको बता दें कि ब्लू स्पेरो को इजराइल की मशहूर रक्षा कंपनी राफेल एडवांस सिस्टम्स ने विकसित किया है। यह वही कंपनी है जिसने दुनिया भर के कई अत्याधुनिक हथियार और मिसाइल सिस्टम बनाए हैं। ब्लू स्पेरो को खासतौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सके और अपने लक्ष्य तक बिना रोके पहुंच सके। दरअसल, इसका पहला कारण है इसका उड़ान का तरीका। दुनिया की ज्यादातर मिसाइलें जमीन के समानांतर या फिर एक तय ऊंचाई पर उड़ती है। इस वजह से रडार सिस्टम उन्हें आसानी से पकड़ लेते हैं। लेकिन ब्लू स्परो का उड़ान पैटर्न बिल्कुल अलग है। जब इसे लॉन्च किया जाता है तो यह सीधी ऊपर की ओर जाती है और एक्सो एटमॉस्फियर फेज यानी कि अंतरिक्ष की दहलीज के करीब पहुंच जाती है।
इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह अचानक अपने लक्ष्य की दिशा में नीचे की ओर गिरती है। यहीं पर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे बड़ी समस्या पैदा हो जाती है। दरअसल ज्यादातर रडार सिस्टम क्षितिज यानी कि सामने की दिशा में आने वाले खतरे को स्कैन करते हैं। वे जमीन के समानांतर उड़ने वाली मिसाइलों को पकड़ने के लिए डिजाइन किए गए हैं। लेकिन जब कोई मिसाइल ऊपर से लगभग 90 डिग्री के कोण पर सीधे नीचे गिरती है तो रडार के लिए उसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। रडार के ठीक ऊपर एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां तकनीकी भाषा में ब्लाइंड स्पॉट कहा जाता है। इस ब्लाइंड स्पॉट में आने वाली चीजों को रडार तुरंत पहचानता नहीं है। ब्लू स्पेरो इसी कमजोरी का फायदा उठाता है। जब तक एयर डिफेंस सिस्टम को समझ में आता कि ऊपर से कोई खतरा आ रहा है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और यही वजह है कि इस मिसाइल को रोकना बेहद नामुमकिन माना जाता है।
इस मिसाइल की रफ्तार हाइपरसोनिक स्तर तक पहुंच सकती है। यानी यह ध्वनि की गति से कई गुना तेज चलती है। जब यह अंतरिक्ष जैसी ऊंचाई से नीचे गिरती है। गुरुत्वाकर्षण और इसकी खुद की गति मिलकर इसे और भी तेज बना देते हैं। इसकी स्पीड इतनी ज्यादा होती है कि दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिज्ञा देने का भी लगभग कोई समय नहीं होता है। यानी मिसाइल का पता चलने और उसे रोकने के बीच का समय बेहद कम होता है और इसी वजह से इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है। इस मिसाइल की एक और खासियत इसका लॉन्च प्लेटफार्म है। ब्लू स्पेरो को जमीन से लॉन्च नहीं किया जाता है। इसे हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमान से छोड़ा जाता है। खासतौर पर ऋ15 ईगल जैसे शक्तिशाली फाइटर जेट से इसे लॉन्च किया जाता है।
ब्लू स्पैरो की परिचालन क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर है। इसे मूल रूप से इजराइल की एरो रक्षा प्रणाली के लिए दुश्मन के बैलिस्टिक खतरों का अनुकरण करने के लिए बनाया गया था। यह हथियार अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण करता है, जिससे पारंपरिक हवाई रक्षा नेटवर्क द्वारा इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसकी अद्वितीय परिचालन क्षमता इसे भविष्य के गहन हमलों के लिए एक प्रमुख सामरिक विकल्प बनाती है।
12 घंटों में लगभग 900 हमलों की शुरूआती बौछार के बाद, क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ गया है। ईरान ने तुरंत सैकड़ों मिसाइलों और हजारों ड्रोनों से जवाबी कार्रवाई की। ईरानी सेना ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है। जैसे-जैसे युद्ध एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर रहा है, इजराइल शेष बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए अधिक उन्नत मिसाइलों को तैनात कर सकता है।

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