गोड्डा

राष्ट्रीय लोक अदालत में 17,305 मामलों का निष्पादन

3.33 करोड़ रुपये से अधिक का हुआ समझौता

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गोड्डा : झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान सुलहनीय मामलों के त्वरित निष्पादन के तहत कुल 17,305 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें 3,33,65,258 रुपये की राशि का समझौता हुआ। निष्पादित मामलों में बैंक रिकवरी, क्रिमिनल कंपाउंडेबल, बिजली बिल, पानी बिल, उपभोक्ता वाद, एमएसीटी, वैवाहिक विवाद (मेट्रीमोनियल), अन्य सिविल वाद, एक्साइज, सर्टिफिकेट, फ्रंट ऑफिस, नियोजन, ट्रैफिक चालान और कोटपा से जुड़े मामले शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला जज रमेश कुमार ने एमएसीटी के तहत दो दावाकर्ताओं को दावा भुगतान के चेक भी वितरित किए। इससे पहले लोक अदालत का ऑनलाइन उद्घाटन झालसा के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस सूजित नारायण प्रसाद द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दीपक कुमार ने किया। मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए सात न्यायिक बेंच का गठन किया गया था। प्रथम बेंच में पारिवारिक विवाद, मेट्रीमोनियल और सीआरपीसी 125 के मामलों की सुनवाई परिवार न्यायालय के प्रधान जज अनिल कुमार पांडेय और एलएडीसी रीतेश कुमार सिंह ने की। द्वितीय बेंच में एमएसीटी, सिविल व क्रिमिनल अपील, राजस्व व श्रम विवाद से जुड़े मामलों का निपटारा जिला जज प्रथम कुमार पवन और एलएडीसी राहुल कुमार ने किया। तृतीय बेंच में बिजली से संबंधित मामलों की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋचा श्रीवास्तव और पैनल अधिवक्ता आशिष कुमार ने की। चतुर्थ बेंच में सीजेएम व एसडीजेएम कोर्ट के कंपाउंडेबल मामलों की सुनवाई सीजेएम चंदन कुमार और पैनल अधिवक्ता अरविंद कुमार गुप्ता ने की। पंचम बेंच में एनआई एक्ट, एक्साइज, फॉरेस्ट और माप-तौल से जुड़े मामलों का निपटारा एसीजेएम प्रताप चंद्रा और पैनल अधिवक्ता मृगेन्द्र कुमार झा ने किया। छठे बेंच में बैंक रिकवरी, प्री-लिटिगेशन, रेवेन्यू, म्यूटेशन, 107 सीआरपीसी, सेल्स टैक्स, पानी व होल्डिंग टैक्स से जुड़े मामलों की सुनवाई न्यायिक दंडाधिकारी मुक्ति भगत और अनुमंडल दंडाधिकारी बैद्यनाथ उरांव ने की। सातवें बेंच में उपभोक्ता वाद से संबंधित मामलों का निपटारा सब जज प्रवीण उरांव और जिला कंज्यूमर फोरम की सदस्य अनिता मंडल ने किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का आपसी समझौते से निपटारा होने पर वादकारियों ने संतोष व्यक्त किया।
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