मजदूरी से स्ट्रॉबेरी की खेती तक: कपूर मुनी दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
From labour to strawberry farming: Kapoor Muni Didi became an example of self-reliance

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित साहेबनगर गांव की रहने वाली कपूर मुनी दीदी आज महिला सशक्तिकरण और आधुनिक खेती की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। कभी खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली कपूर मुनी दीदी ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। उनकी यह यात्रा वर्ष 2016 में शुरू हुई, जब सीआरपी दीदी के प्रोत्साहन से वह ‘गुलाब बाहा आजीविका सखी मंडल’ से जुड़ीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत की आदत विकसित की, प्रशिक्षण प्राप्त किया और आजीविका के नए अवसरों की जानकारी हासिल की। वर्ष 2025 में उनके जीवन में बड़ा बदलाव तब आया, जब जेआईसीए परियोजना के तहत उन्हें सूक्ष्म टपक सिंचाई यंत्र उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उन्होंने अपने 25 डिसमिल खेत में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी और उद्यान विभाग, पाकुड़ के सहयोग से उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले स्ट्रॉबेरी पौधे और मल्चिंग प्लास्टिक भी उपलब्ध कराया गया। अब तक उन्होंने करीब 15 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री की है, जिससे उन्हें 7,500 रुपये की आय हो चुकी है। उत्पादन बढ़ने के साथ इस सीजन में उन्हें लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय होने की संभावना है। कपूर मुनी दीदी की इस पहल से क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। साहेबनगर और आसपास के गांवों के किसान उनकी खेती देखने पहुंच रहे हैं और आधुनिक सिंचाई तकनीक तथा उन्नत बागवानी पद्धतियों को अपनाने के लिए उत्साहित हो रहे हैं। कपूर मुनी दीदी ने अपनी सफलता के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, उद्यान विभाग, पाकुड़, जेआईसीए परियोजना तथा ‘गुलाब बाहा आजीविका सखी मंडल’ की सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के मार्गदर्शन और सहयोग से ही उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाकर सफल खेती करने का अवसर मिला।



