सिंगरौली
42 किता जमीन का खेल! फर्जी मौत, दो-दो वसीयत और नामांतरण
गोविन्द, दुर्गेश, बबोलेराम व राधिका प्रसाद पर बड़ा आरोप?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
सिंगरौली जिले में जमीन हड़पने के कथित खेल का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग कह रहे हैं कि यहां तो “मौत भी कागजों से पैदा और खत्म” हो रही है। आरोप है कि 42 किता जमीन हड़पने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर दो-दो वसीयत तक तैयार करा दी गईं, और राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण कराने की कोशिश भी हो गई।
ग्राम पचौर निवासी प्रिन्स शुक्ला और सूचित शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक सिंगरौली को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि गोविन्द उपाध्याय, दुर्गेश उपाध्याय, बबोलेराम उपाध्याय और राधिका प्रसाद उपाध्याय ने मिलकर उनकी परिजन स्व. कलावती पत्नी रामदत्त शुक्ला के नाम दर्ज ग्राम धतुरा पोखरा की 42 किता भूमि हड़पने की पूरी पटकथा लिख डाली।
शिकायत के अनुसार कलावती की मृत्यु वर्ष 1989 में ही हो चुकी थी, लेकिन कथित तौर पर कागजों में उन्हें दोबारा “मरवाकर” 2013 का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा दिया गया। इसके बाद 21 नवंबर 2012 की एक वसीयत सामने आई और उसी के सहारे तहसील में नामांतरण का आवेदन लगा दिया गया।
हालांकि मामला जब नायब तहसीलदार न्यायालय पहुंचा तो सुनवाई के बाद 20 दिसंबर 2023 को वसीयत के आधार पर नामांतरण का आवेदन खारिज कर दिया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहली चाल नाकाम होने के बाद दूसरी चाल चली गई और 31 दिसंबर 2012 की एक और वसीयत तैयार कराकर दोबारा नामांतरण का आवेदन लगा दिया गया। इसके बाद नायब तहसीलदार बुद्धसेन माझी के न्यायालय में प्रकरण दर्ज हुआ और 30 दिसंबर 2024 को गोविन्द उपाध्याय और बबोलेराम उपाध्याय के पक्ष में नामांतरण आदेश भी पारित हो गया।
आरोप यह भी है कि इस पूरे खेल में कुछ राजस्व अधिकारियों, पटवारी और नोटरी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गुपचुप तरीके से रिपोर्ट तैयार कर नामांतरण करा दिया गया और बाद में रिकॉर्ड में भी बदलाव किया गया।
हालांकि बाद में 6 जनवरी 2025 को उक्त नामांतरण आदेश निरस्त कर दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि रिकॉर्ड से अब तक आरोपियों का नाम नहीं हटाया गया है, जिससे पूरे मामले पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रार्थियों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि फर्जी दस्तावेज, कूटरचना और धोखाधड़ी के इस पूरे मामले की गहन जांच कर आरोपी गोविन्द उपाध्याय, दुर्गेश उपाध्याय, बबोलेराम उपाध्याय और राधिका प्रसाद उपाध्याय समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 467, 468 और 420 के तहत मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि 42 किता जमीन का यह “कागजी खेल” आखिर किसके संरक्षण में खेला गया? और क्या प्रशासन इस कथित फर्जीवाड़े की परतें खोल पाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दफन हो जाएगा।



