बेतुल
बैतूल खनिज परिवहन नियमों में सख्ती से बढ़ी परेशानी
वैध खनिज भी घोषित हो रहा अवैध, न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत अवैध खनन, परिवहन और भंडारण रोकने के लिए बनाए गए प्रावधान अब व्यावहारिक और कानूनी विवाद का कारण बन रहे हैं। जिला न्यायालय बैतूल के अधिवक्ता भारत सेन ने अपने विश्लेषण में बताया कि मध्य प्रदेश में लागू खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की रोकथाम) नियम 2006 और 2022 के तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास अनिवार्य है, लेकिन इसकी समय सीमा समाप्त होने पर वैध खनिज को भी अवैध मानकर वाहन जब्त किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 23सी राज्य सरकार को नियम बनाने का अधिकार देती है, लेकिन ये नियम मूल कानून के विरुद्ध नहीं हो सकते। वहीं धारा 21 अवैध उत्खनन पर दंड और वसूली का प्रावधान करती है, जिसमें रॉयल्टी और खनिज मूल्य तक की वसूली शामिल है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में अवैध परिवहन के मामलों में रॉयल्टी का 15 गुना जुर्माना वसूला जा रहा है, जो कई मामलों में कानून की भावना से अधिक कठोर प्रतीत होता है। व्यावहारिक स्थिति में सबसे बड़ी समस्या तब सामने आती है जब वैध ईटीपी के साथ खनिज लदा वाहन रास्ते में खराब हो जाता है और समय सीमा समाप्त हो जाती है। निरीक्षण के दौरान ऐसे मामलों में वाहन और खनिज जब्त कर लिए जाते हैं, जबकि संबंधित रॉयल्टी पहले ही जमा होती है। इस स्थिति में यह प्रश्न उठता है कि क्या केवल समय सीमा समाप्त होने से खनिज अवैध हो जाता है और क्या यह दोहरी वसूली नहीं है। अधिवक्ता भारत सेन के अनुसार, इस स्थिति को समझने के लिए एक सामान्य उदाहरण पर्याप्त है कि यदि निर्धारित समय से देर से ट्रेन पहुंचती है तो यात्री की टिकट अमान्य नहीं होती, उसी तरह अनैच्छिक देरी को अवैध परिवहन मानना न्यायसंगत नहीं है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी कुछ मामलों में निर्देश दिए हैं कि ईटीपी और दस्तावेजों की वास्तविकता जांची जाए और सही पाए जाने पर वाहन मुक्त किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियमों की कठोर व्याख्या से कारोबारियों पर आर्थिक दबाव और शोषण जैसी स्थिति बनती है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 के तहत चुनौती योग्य हो सकता है। इसके बावजूद अधिकांश कारोबारी इन प्रावधानों को न्यायालय में चुनौती नहीं देते, जिससे समस्या बनी हुई है। अधिवक्ता भरत सेन ने सुझाव दिया है कि वाहन खराबी जैसी परिस्थितियों को अपवाद मानते हुए लचीला दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। साथ ही खनिज कारोबारियों को विशेषज्ञ अधिवक्ताओं की मदद लेकर इन नियमों की वैधता पर विधिक प्रश्न उठाने चाहिए, ताकि कानून का उद्देश्य संरक्षण बना रहे, न कि वैध कारोबारियों पर अनावश्यक दबाव।



