धर्म

भारीजा माता में नवरात्रा आज से शुरू

नो दिनों तक माता के दरबार में धार्मिक कार्यक्रम होंगे आयोजित

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

दांतारामगढ़। भारीजा गाँव मे पहाड़ी पर स्थित दुर्गा माता मंदिर में गुरुवार से नवरात्रा महोत्सव शुरू होगा। जानकारी के अनुसार जय अम्बे विकास समिति भारीजा के सदस्यों तथा पुजारी प्रेमसुखजी स्वामी, पुरणजी स्वामी ने बताया कि नवरात्रि महोत्सव में गुरुवार को सुबह 8 :15 कलश यात्रा निकाली जाएगी जो गणेशजी मंदिर से माताजी तक निकाली जाएगी, तथा 11:15 घटस्थापना के साथ पुजा अर्चना की जायेगी तथा प्रतिदिन श्री दुर्गा सप्तशीत पाठ, नव चंडी संगीतमय रामायण पाठ का आयोजन होगा। वहीं प्रतिदिन कन्या भोजन व भंडारा का आयोजन होगा। वहीं पुजारी परिवार की तरफ से दिनांक 24 मार्च को विशाल भंडारा व भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा जिसमें भजन संध्या शाम को गायक कलाकार दिनेश भट्ट एंड पार्टी के द्वारा किया जायेगा। दिनांक 25 मार्च को नवरात्रि भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा जिसमें गायक कलाकार संजय सौनी अड़कसर एंड पार्टी द्वारा किया जायेगा। महाआरती हवन-यज्ञ भंडारा 26 मार्च को तथा नौ दिन तक माता के दरबार में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे ।

भारीजा ग्राम में स्थित आदिशक्ति पहाड़ों वाली दुर्गा माता के है चमत्कार यहां से कोई भक्त नहीं जाता खाली हाथ

दांतारामगढ़ के निकटवर्ती भारीजा में स्थित यह मंदिर एक प्राकृतिक आवरण रूपी पहाड़ी पर स्थित है, जिसके कारण पहाड़ों वाली माता मंदिर के नाम से जाना जाने लगा है। यह मंदिर धार्मिक तथा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
भारीजा गाँव मे पहाड़ी पर स्थित माताजी मंदिर में सार्वजनिक दुर्गा पूजा एवं नौ दिवसीय नवरात्रा महोत्सव का आयोजन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस मंदिर से लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में खाटूश्यामजी मन्दिर तथा जीणमाताजी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। जानकारी सूत्रों के अनुसार पहाड़ों वाली माता की पूजा लगभग 18वीं सदी में सर्वप्रथम कुमावत परिवार के एक महिला द्वारा सेवा की जाती थी, उसके बाद वैष्णव परिवार की महिला के द्वारा फिर जमनदासजी महाराज के द्वारा सेवा पूजा की जाने लगी, जमनदासजी महाराज को वचन सिद्धि पूजारी कहा जाता था, किंवदंती है कि जमनदासजी महाराज, माताजी के सामने मुख करते हुए जो बोल देते थे वो बात सही होती थी। वर्तमान में जमनदासजी महाराज के परिवार से पूजा कर रहे हैं । यह अग्रवाल समाज की कुलदेवी हैं, जिनका जात जडुला यहां चढ़ाया जाता है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button