
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : जिला मुख्यालय सहित सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के चैती दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना के साथ बासंतिक नवरात्र का शुभारंभ हो गया। इसके साथ ही पूरे जिले में भक्ति और आस्था का वातावरण बन गया है। नवरात्र के प्रथम दिन से ही मंदिरों में दुर्गा सप्तशती पाठ, अखंड संकीर्तन तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। साथ ही आज से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होने पर लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।जिला मुख्यालय के हटिया परिसर स्थित चैती दुर्गा मंदिर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई, जिसके बाद अखंड संकीर्तन आरंभ हो गया। मंदिर परिसर में पारंपरिक रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ भी जारी है। वहीं, नवदुर्गा की स्थापना को लेकर कलाकारों द्वारा प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। फिलहाल यज्ञ मंडप में रामदरबार की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धालु अखंड संकीर्तन में भाग ले रहे हैं।चैती दुर्गा मंदिर पूजा समिति हटिया के सदस्य अशोक कुमार साह ने बताया कि इस मंदिर में पिछले 70 वर्षों से चैती दुर्गा पूजा भव्य रूप से आयोजित होती आ रही है। नवरात्र के पहले दिन से लेकर दशमी तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतिम दिन जिले के दर्जनों अखाड़ों का मिलन हटिया प्रांगण में होता है, जिसके बाद भव्य विसर्जन किया जाता है। पूजा को आकर्षक बनाने के लिए भव्य तोरण द्वार और जगह-जगह पंडालों का निर्माण कराया जा रहा है। इसी प्रकार सदर प्रखंड के सिकटिया, पोड़ैयाहाट, महागामा, पथरगामा के चिहारो पहाड़, बेलसर, बसंतराय, ठाकुरगंगटी, मेहरमा, बोआरीजोर एवं सुंदरपहाड़ी सहित विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। वहीं पंडित अर्जुन झा के अनुसार इस वर्ष देवी भगवती पालकी पर सवार होकर आएंगी। उन्होंने बताया कि देवी भागवत महापुराण के अनुसार जब माता की सवारी पालकी होती है, तो यह सामाजिक हलचल और परिवर्तन का संकेत माना जाता है। ऐसे समय में लोगों को अधिक जप-तप, दान-पुण्य और साधना करने की आवश्यकता होती है।



