बागपत

बूंदाबांदी ने बदला मौसम का मिज़ाज

किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों हो रही हल्की बूंदाबांदी ने जहां एक ओर मौसम को सुहावना बना दिया है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह राहत नहीं, बल्कि चिंता का कारण बन गई है। ठंडी हवाओं और बादलों की आवाजाही ने गर्मी से राहत जरूर दी है, लेकिन खेतों में खड़ी फसलों पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।
 फसलों को हो रहा नुकसान
इस समय गेहूं, सरसों और आलू जैसी प्रमुख फसलें अपने अंतिम चरण में हैं। ऐसे में लगातार नमी और बूंदाबांदी से—
गेहूं की बालियां झुकने लगी हैं, जिससे दाना कमजोर पड़ सकता है
सरसों की फसल में दाना काला पड़ने का खतरा बढ़ गया है
आलू और सब्जियों में सड़न की समस्या देखने को मिल रही है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मौसम कुछ दिन और बना रहा तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
 मौसम सुहाना, लेकिन चिंता भारी
जहां आम लोगों के लिए यह मौसम सैर-सपाटे और राहत का कारण बना है, वहीं किसानों के लिए हर बूंद एक चिंता लेकर आ रही है। खेतों में पानी भरने और धूप न निकलने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
 किसानों की पीड़ा
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरे साल मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन कटाई से ठीक पहले मौसम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई किसानों का यह भी कहना है कि अगर तेज बारिश या ओलावृष्टि हो गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
 कृषि विशेषज्ञों की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है—
खेतों में जल निकासी (ड्रेनेज) की उचित व्यवस्था रखें
फसल में फंगल संक्रमण से बचाव के लिए दवा का छिड़काव करें
कटाई के लिए तैयार फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं
 संवाददाता सुरेंद्र मलानिया का वक्तव्य
संवाददाता सुरेंद्र मलानिया ने कहा—
“मौसम का यह बदला हुआ मिज़ाज आमजन के लिए भले ही सुकून लेकर आया हो, लेकिन खेतों में खड़ी फसल के लिए यह किसी परीक्षा से कम नहीं है। किसान पूरे साल मेहनत करता है और जब फसल तैयार होती है, तब ऐसी बूंदाबांदी उसकी उम्मीदों पर चोट करती है।
जरूरत है कि सरकार और प्रशासन समय रहते किसानों की स्थिति का आकलन करें। यदि नुकसान होता है, तो तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए और कृषि विभाग किसानों को तकनीकी सहायता दे, ताकि नुकसान कम किया जा सके। अन्नदाता सुरक्षित रहेगा, तभी देश की थाली भरी रहेगी।”
 आर्थिक असर
फसलों को हुए नुकसान का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा। पहले से ही बढ़ती लागत और बाजार में अनिश्चितता झेल रहे किसान अब मौसम की मार से और कमजोर होते नजर आ रहे हैं।
बूंदाबांदी ने मौसम को भले ही खुशनुमा बना दिया हो, लेकिन खेतों में खड़ी फसलें इस बदलाव की कीमत चुका रही हैं। समय रहते उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि किसानों की मेहनत और देश की अन्न सुरक्षा दोनों को बचाया जा सके।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button