
भोपाल। मध्यप्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ बैठक कर कानूनी रणनीति पर चर्चा की। सरकार हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करेगी। इस फैसले का असर भर्ती परीक्षाओं में होल्ड रखे गए 13 प्रतिशत पदों पर भी पड़ेगा।
मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ बैठक कर आगे की कानूनी रणनीति पर चर्चा की। बैठक में प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने और उस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एवं प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़े विधिक पहलुओं और आगामी कानूनी कार्यवाही की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी
जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थिति बदल गई है। फैसले के मुताबिक, ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। वहीं, 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत अतिरिक्त 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखने और उनके परिणाम जारी करने से जुड़ा मामला भी प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार अब हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मामले से जुड़े तथ्य, आंकड़े और जरूरी दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए हैं।



