बुलंदशहर
मेघनाद वध के उपरांत पति वियोग में सती हुई सुलोचना
अहिरावण वध और राम रावण युद्ध से दर्शक हुए रोमांचित

पत्रकारों को किया गया स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
औरंगाबाद बुलंदशहर मंदिर पर चल रही रामलीला में सोमवार को मेघनाद वध, सती सुलोचना, अहिरावण वध और सर्वस्य गंवा बैठे लंका पति रावण का युद्ध भूमि में प्रवेश और राम-रावण युद्ध की लीला का मंचन किया गया। आयोजकों ने क्षेत्रीय पत्रकारों को भी अंगवस्त्र पहना स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
श्री राम लीला अभिनय मंडल के तत्वावधान में चल रही रामलीला का सोमवार की रात्रि में राजेन्द्र गुप्ता पत्रकार एवं अनिल शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर भगवान श्री राम की आरती उतार कर शुभारंभ किया। आयोजकों ने अतिथियों को अंगवस्त्र पहना कर स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। आयोजकों ने स्थानीय पत्रकारों राजेन्द्र अग्रवाल, राजेन्द्र गुप्ता, सुरेंद्र शर्मा,ग्रीश शर्मा, राजीव शर्मा, रिंकू लोधी, नकुल गुप्ता, सचिन गुप्ता, चेतन शर्मा, मनोज गुप्ता, राजेश गोयल, बलबीर शर्मा, राजू लोधी आदि का अंगवस्त्र पहना कर स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
मंडल के कलाकारों ने डायरेक्टर पुनीत सिंघल के दिशा-निर्देशन में मेघनाद लक्ष्मण युद्ध से लीला का शुभारंभ किया। लक्ष्मण द्वारा मेघनाद वध के उपरांत उसकी पत्नी सुलोचना का मार्मिक विलाप और अपने पति के सीस को रामादल में जाकर लेकर आने और अपने पति के शव के साथ सती हो जाने की मार्मिक लीला देख दर्शक भावनाओं में डूब गये। अहिरावण द्वारा राम लक्ष्मण का धोखे से हरण और हनुमान जी द्वारा पाताल लोक में जाकर अहिरावण वध कर श्री राम लक्ष्मण को वापस लेकर लौटने और रावण द्वारा युद्ध भूमि में प्रवेश कर राम जी के साथ युद्ध की लीला देख दर्शकों ने जय श्री राम के नारे बुलंद किए।रावण द्वारा मंगलवार को पुनः युद्ध के लिए ललकारने के साथ लीला को विराम दिया गया।
सुलोचना के रूप में डायरेक्टर पुनीत सिंघल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मेघनाद का रोल ललित शर्मा ने राम का रोल अनुज सिंघल ने लक्ष्मण का विशाल कंसल ने हनुमान का नितिन सिंघल ने और अंगद का रोल चेतन कंसल ने शानदार ढंग से अदा कर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
मंच संचालन मनोज गुप्ता ने किया। योगेश कुमार अग्रवाल, राजेश गर्ग, टीनू ,ध्रुव कुमार सिंघल, राजेश गोयल, बलबीर शर्मा, हरेंद्र लोधी, नवनीत गुप्ता, सचिन अग्रवाल, कोमित अग्रवाल आदि ने व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। पुलिस व्यवस्था चाक-चौबंद रही।



