किसी भी इल्म के साथ बच्चों में आदर्श शिक्षा की भी है जरूरत

एनपीटी,
आज से केवल 15 वर्ष पहले की सामाजिक समरसता व भाईचारे, छोटे – बड़े में एक- दुसरे की अहमियत समेत अन्य लोगों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यव्हार की मधुर ध्वनि शायद वर्तमान में कागज के पन्ने व स्मार्टफोन की जमाने में सोशल मीडिया प्लेटफार्म में ही कैद रह गया। नतीजतन आज से केवल 15 वर्ष पहले की जो लोगों की शादगीपूर्ण जिंदगी और मैत्रीपूर्ण व्यवहार व छोटे-बड़े में जो अहमियत थी, शायद वो गुम होता हुआ नजर आ रहा है। लोग व्यस्तता के जीवन में और सोशल मीडिया प्लेटफार्म की बेतहाशा उपयोग में व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स सैंडल पर ही चैट शेयर कर दिल की बातें तो किया कर लेते हैं। लेकिन शायद हकीकत में 15 वर्ष पहले लोगों के दिल की धड़कन में जो एहसास हुआ करता था, शायद आज वो एहसास भी हृदय के बजाय सिर्फ और सिर्फ होटों पर देखावे की नाटकीय ढंग कभी- कभी जगजाहिर भी हो रहा है। अक्सर दोस्ती ऐस हुआ करता था जो एक- दूसरे के लिए एक आयाम स्थापित किया करता था, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जमाने में ऐसी हजारों दोस्ती देखने को मिल रही है कि सिर्फ कमेंट्स बॉक्स में ही बड़े-बड़े बातें किया करते हैं, लेकिन दिल की गहराई में जो एहसास हुआ करता था , शायद वो सिमट कर रह गया। हालांकि सोशल मीडिया के जमाने में भी चैट के माध्यम से सुदूर प्रांत में रह रहे लोगों से कभी – कभी प्यार की कहानियां भी वाइरल होता हुआ अखबारों के पन्नों तक जगजाहिर होता हुआ नजर आया करता है। बाहरेहाल जो भी हो आज के आधुनिक वैश्विक दौर में विकास की आयाम स्थापित करने में तो सभी प्रयासरत हैं। लेकिन संवारने की हर गतिविधियों/कार्यशैली पर यदि गौर करे तो बच्चों को किसी भी शिक्षा के साथ- साथ जरूरी है कि आदर्श शिक्षा देना। जिससे उनमें शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ आदर्श की महकती खुशबू का इल्म भी बच्चों में समायोजित होने के साथ उनकी शारीरिक, मानसिक यानी हर दृष्टिकोण से विकसित की उम्मीद की जा सके।