अमेठी

औचक निरीक्षण करें,तब‌‌ पता चलेगी गोशालाओं की हकीकत

मुख्य मंत्री का आदेश बेअसर, मनमानी कर रहे अफसर , बदहाल हैं गोशालाएं

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो

अमेठी। जिले में संचालित गोवंश आश्रय स्थलों के हालात बहुत खराब है। मुख्यमंत्री की ओर से जारी कड़े निर्देशों का अमेठी में पशु पालन विभाग और ग्राम्य विकास विभाग पर कोई ‌असर नहीं है।
सरैया दुबान में वृहद गोवंश आश्रय स्थल है। यहां गोवंशो की संख्या सात सौ‌ के आसपास है। संरक्षित गोवंशों को समुचित आहार नहीं मिल रहा है। गांव के एक जागरूक नागरिक ने बताया कि जब भी शासन से कोई अधिकारी या मंत्री आता है तो सी वी ओ और जिले के आला अधिकारी एक गौशाला को सजा संवारकर दिखा देते हैं। औचक निरीक्षण कभी नहीं होता।
नुंवावा के अमित मिश्र ने कहा कि गौ आश्रय स्थलों के संचालन के मामले में
प्रधान, सेक्रेटरी, बी डी ओ नोडल अधिकारी , और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कोई गंभीर नहीं है। गोशाला के लिए धनराशि प्रधान और सेक्रेटरी के संयुक्त खाते में आती है। गायों की दुर्दशा के बारे में जब उन्हें फोन किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझसे कोई मतलब नहीं।
टीकरमाफी में दो गोवंश आश्रय स्थल संचालित हैं। गोवंश के मरने पर उन्हें जंगल में गाड़ दिया जाता है।कभी कभी मरे पशु काफी दिन तक जंगल में पड़े रहते हैं। यहां गोवंशो‌ की संख्या आठ सौ‌ के आसपास है।
जगदीशपुर में एक गोवंश आश्रय स्थल पर गाय के मरने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। सोमवार को नुवांवा का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
महमूदपुर में पिछले महीने दो गोवंशो की मौत की खबर अखबार में छपने के बाद सेक्रेटरी का स्थानांतरण कर दिया गया अभी भी स्थिति ठीक नहीं हुई है।
सी वी ओ गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण बराबर कर रहे हैं। खंड विकास अधिकारियों और नोडल अधिकारियों ने निरीक्षण बंद कर दिया है। भाजपा के जिला मंत्री अजय विश्व कर्मा ने कहा कि प्रभारी मंत्री और शासन के उच्चाधिकारियों को गोवंश आश्रय स्थलों का औचक निरीक्षण करना चाहिए। असलियत तब पता चलेगी। माननीय मुख्यमंत्री जी गायों की जैसी सेवा चाहते हैं वैसा काम कहीं भी नहीं हो रहा है।

कोट :
अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों और गोशालाओं के संचालन के लिए शासन की ओर से पांच साल पहले ही शासनादेश जारी किया गया था।इस शासनादेश का अनुपालन सभी विभाग ठीक से नहीं कर रहे हैं, इसीलिए समस्या आ रही है। पशुपालन विभाग के पास स्टाफ नहीं है, फिर भी विभागीय दायित्वों को पूरा करने के साथ हमारे पशु चिकित्सा अधिकारी बराबर गोशालाओं की निगरानी कर रहे हैं। गोशाला का बजट सम्बंधित ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी के संयुक्त खाते में आता है। सेक्रेटरी प्रतिदिन निगरानी नहीं करते, यहां तक की गोवंशों की मौत पर सूचना भी नहीं देते।
डा गोपाल कृष्ण शुक्ल
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी,अमेठी

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