बागपत

राजभाषा से राष्ट्र सेवा का संकल्प, बागपत में केंद्र सरकार के विभागों ने तय की नई रणनीति

नराकास की उपसमिति की बैठक संपन्न, आगामी छमाही बैठक की बनाई कार्ययोजना

नराकास समिति ने डिजिटल युग में हिंदी सेतु एप बनाकर राजभाषा को बनाया सुलभ
हिन्दी केवल भाषा नहीं, राष्ट्र निर्माण की आधारशिला: राजभाषा संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने किया मंथन
फाइल से लेकर वेबसाइट तक, केंद्र सरकार के विभागों में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग पर जोर
बागपत :  गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार जनपद बागपत में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) के तत्वावधान में उप समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, कार्यालयों, संस्थानों, इंश्योरेंस तथा बैंकों के अधिकारियों ने भाग लेकर राजभाषा हिन्दी के कार्यालयी प्रयोग को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में आगामी छमाही बैठक के लिए एजेंडा निर्धारित किया गया तथा सभी कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।
बैठक का आयोजन चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान, बागपत के मुख्य सम्मेलन कक्ष में किया गया। इस दौरान नराकास बागपत के सचिव अभय नाथ मिश्र ने गृह मंत्रालय द्वारा जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सरकारी कार्यालयों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाना न केवल संवैधानिक दायित्व है, बल्कि यह आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को सरल और प्रभावी बनाता है। उन्होंने सभी विभागों से आह्वान किया की कि वे पत्राचार, नोटिंग, फाइल कार्य, वेबसाइट और सूचना पट्टों में हिन्दी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें।
आज डिजिटल युग में हिन्दी का महत्व और अधिक बढ़ गया है। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल संचार के माध्यम से हिन्दी का उपयोग प्रशासन को अधिक जनसुलभ बना रहा है। बागपत की नराकास समिति ने हिंदी सेतु एप बनाकर सभी अधिकारियों कर्मचारियों के लिए हिंदी को सुलभ बनाया है जिसपर एक क्लिक पर हिंदी राजभाषा से संबंधित संस्थानों, संसाधनों, टूल्स आदि की जानकारी उपलब्ध है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में नराकास बागपत के अंतर्गत और अधिक राजभाषा कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों को हिन्दी में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा और राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
वहीं हिंदी के विकास में मातृभाषा की भूमिका विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि हिन्दी और मातृभाषा का संबंध समाज और प्रशासन को जोड़ने वाला सेतु है। जब सरकारी कार्य हिन्दी में होता है, तो आम नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं, सेवाओं और सूचनाओं को समझना आसान हो जाता है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है।
इस अवसर पर विभिन्न केंद्रीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों के राजभाषा अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र सेवा में राजभाषा हिन्दी के महत्व को स्वीकार करते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
इस दौरान संस्थान से संयुक्त आयुक्त डॉ अश्वनी कुमार सिंह, सहायक आयुक्त डॉ विकास गुप्ता, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय चांदीनगर से प्रधानाचार्य शिल्पा मल्होत्रा एवं शिक्षक उमेश शर्मा, जवाहर नवोदय विद्यालय से वंदना, केवी बावली से दीपिका राठी, सेंट्रल बैंक से पंकज मलिक, बैंक ऑफ बड़ौदा रॉबिन सिंह, स्टेट यूथ अवॉर्डी अमन कुमार आदि मौजूद रहे।
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